मुंबई, 10 अक्टूबर (भाषा) मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर निर्वाचन आयोग की आलोचनाओं के बीच पूर्व निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा ने कहा है कि यदि गैरकानूनी काम हुए हैं, तो किसी न किसी को इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी।
लवासा ने शुक्रवार को यहां एक कार्यक्रम में कहा कि केंद्र सरकार ने कानून में बदलाव करके और निर्वाचन आयुक्तों के चयन के लिए बनी समिति से प्रधान न्यायाधीश को हटाकर एक ऐसा कदम उठाया है, जिस पर पक्षपात के आरोप लगना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि यह उन लोगों के साथ भी अन्याय है जिन्हें नियुक्त किया जाता है।
लवासा ने कहा कि निर्वाचन आयोग के भीतर मतभेदों की खबरों के बाद चीजें थोड़ी अधिक गंभीर हो गई हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘क्योंकि अब आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ गैरकानूनी काम किए गए हैं। मुझे लगता है कि यह एक गंभीर बात है। मैं (गैरकानूनी कामों के बारे में) निश्चित रूप से कुछ नहीं कह सकता। लेकिन अगर गैरकानूनी काम हुए हैं, तो किसी न किसी को इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी।’’
लवासा ने कहा कि निर्वाचन आयोग को फॉर्म 6 (नए मतदाता पंजीकरण के लिए प्रयुक्त) में बदलाव करने का अधिकार नहीं था और आयोग नियमों में संशोधन करने के लिए सक्षम नहीं है।
भाषा खारी देवेंद्र
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