बेंगलुरु, नौ अक्टूबर (भाषा) कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान 778 ‘फॉर्म 7’ आवेदन जमा करने के आरोपी दो व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर अंतरिम रोक लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने राज्य अभियोजन पक्ष से सवाल किया कि 50 से अधिक ऐसे आवेदन जमा करने को अपराध मानने का कानूनी आधार क्या है।
न्यायमूर्ति अनंत रामनाथ हेगड़े की एकल पीठ ने गुट्टाहल्ली निवासी जी एस वसंतलक्ष्मी और आर दीपक सिंह द्वारा दायर याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं ने कथित तौर पर गलत जानकारी वाले आवेदन जमा करने के लिए अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एम अरुण श्याम ने दलील दी कि उनके मुवक्किल बूथ स्तर के एजेंट (बीएलए) थे, जिन्होंने मतदाता सूची से अयोग्य नामों को हटाने का अनुरोध किया था।
याचिकाओं का विरोध करते हुए अतिरिक्त सरकारी वकील अनूप कुमार ने कहा कि एक व्यक्ति अधिकतम 50 आवेदन ही जमा कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ताओं ने जानबूझकर मतदाता सूची से मतदाताओं के नाम हटवाने का प्रयास किया था।
भाषा सुमित शफीक
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