ग्वालियर, नौ अक्टूबर (भाषा) पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शुक्रवार को कहा कि 1971 का बांग्लादेश युद्ध भारत की सैन्य विजय तक सीमित नहीं था, बल्कि यह मानवता की रक्षा, न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों को कायम रखने से जुड़ी एक ऐतिहासिक घटना थी।
जनरल द्विवेदी यहां वरिष्ठ पत्रकार केशव पांडेय की पुस्तक ‘बांग्लादेश का उदय’ के विमोचन के अवसर पर संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि युद्ध शुरू होने से पहले पूर्वी पाकिस्तान में अत्याचारों और मानवीय संकट के कारण बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़कर भारत में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था।
पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि जटिल अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद भारत ने मानवीय आधार पर शरणार्थियों की सहायता की। इस दौरान देश ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों को भी प्राथमिकता दी।
द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सैनिकों ने असाधारण साहस का प्रदर्शन किया और 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण के बाद बांग्लादेश एक स्वतंत्र देश के रूप में उभरा।
उन्होंने कहा, ‘‘यह केवल भारत की सैन्य विजय नहीं थी, बल्कि मानवता, न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ी एक ऐतिहासिक घटना थी।’’
पूर्व सेना प्रमुख ने कहा, ‘‘इतिहास हमें सिखाता है कि एकता, साहस, मजबूत नेतृत्व और राष्ट्रीय हितों के प्रति समर्पण हमें किसी भी चुनौती का सामना करने की ताकत देते हैं।’’
भाषा सं दिमो शफीक
शफीक