नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित गैर-सरकारी संगठन ‘एनर्जी वॉचडॉग’ की जनहित याचिका पर 15 राज्यों और जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख केंद्रशासित प्रदेशों से जवाब मांगा। याचिका में राज्य विद्युत नियामक आयोगों का कानून के तहत उचित गठन सुनिश्चित करने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने वकील प्रणव सचदेव के माध्यम से दायर याचिका पर नोटिस जारी किया।
याचिका में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को विद्युत अधिनियम, 2003 के प्रावधानों का पालन करने और राज्य विद्युत नियामक आयोगों (एसईआरसी) की संरचना के संबंध में अप्रैल 2018 में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले के निर्देशों को लागू करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
याचिका में कहा गया है कि 15 राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों के बिजली नियामक आयोगों में कई वैधानिक उल्लंघन सामने आए हैं। इनमें अध्यक्ष और सदस्यों के पद लंबे समय से रिक्त रहना तथा आयोगों में कानून के जानकार सदस्य का पूरी तरह अभाव शामिल है।
याचिका के अनुसार, उच्चतम न्यायालय ने 2018 के फैसले में कहा था कि राज्य विद्युत नियामक आयोगों में अदालत जैसी विशेषताएं हैं और उनमें कानून के क्षेत्र में उपयुक्त योग्यता रखने वाला सदस्य होना चाहिए।
याचिका में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरलम, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम और नगालैंड समेत कई राज्यों के आयोगों में इस फैसले के बावजूद कानून के क्षेत्र का कोई सदस्य नहीं है।
याचिका के अनुसार, तमिलनाडु में तीनों पद रिक्त हैं, जबकि आंध्र प्रदेश में अध्यक्ष और तकनीकी सदस्य के पद खाली हैं तथा आयोग केवल वित्त सदस्य के सहारे काम कर रहा है।
पश्चिम बंगाल में केवल अध्यक्ष का पद सृजित किया गया है और मौजूदा अध्यक्ष के पास कानून के क्षेत्र की आवश्यक पृष्ठभूमि नहीं है।
याचिका में कहा गया है कि यह विफलता संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत उपभोक्ताओं की न्याय तक पहुंच को प्रभावित करती है। कानून के क्षेत्र के अनिवार्य सदस्य के बिना उपभोक्ताओं को विद्युत अधिनियम के तहत शिकायतों पर वैध निर्णय नहीं मिल सकता।
भाषा राखी शफीक
शफीक