नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर (भाषा) दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बाल विवाह के उन्मूलन और कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा को महिला सशक्तीकरण के दो महत्वपूर्ण आधार बताते हुए शुक्रवार को कहा कि प्रत्येक लड़की को अपने सपने पूरे करने और अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में महिला एवं बाल विकास पर आयोजित दो दिवसीय विभागीय शिखर सम्मेलन में गुप्ता ने महिला सुरक्षा के लिए शिकायतों के समयबद्ध समाधान, तकनीक आधारित निगरानी और हेल्पलाइन से पुनर्वास तक सहायता की एकीकृत व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के एक बयान के मुताबिक, गुप्ता ने कहा, “महिलाओं की सुरक्षा पुलिस, प्रशासन, स्थानीय निकायों, संबंधित विभागों और समाज की साझा जिम्मेदारी है। सभी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय और जवाबदेही से ही महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया जा सकता है।”
उन्होंने कहा कि संकट में किसी महिला को सहायता के लिए अलग-अलग संस्थाओं के चक्कर नहीं लगाने चाहिए तथा उसे समय पर मदद, न्याय और पुनर्वास तक सहयोग मिलना चाहिए।
गुप्ता ने महिला सुरक्षा के लिए पांच प्रमुख कार्यबिंदु भी प्रस्तुत किए जिनमें प्रत्येक पीड़िता के लिए व्यक्तिगत देखभाल योजना, महिला हेल्पलाइन और ‘वन स्टॉप सेंटरों’ का बेहतर एकीकरण, परामर्श एवं कानूनी सहायता तक आसान पहुंच, बाल विवाह का उन्मूलन तथा कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम से जुड़े कानून का प्रभावी अनुपालन शामिल है।
उन्होंने कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों के लिए ‘शी-बॉक्स’ पोर्टल का व्यापक उपयोग करने और निजी क्षेत्र में इससे जुड़ाव बढ़ाने पर जोर दिया।
गुप्ता ने कहा कि महिलाओं को यह जानकारी और भरोसा होना चाहिए कि समस्या आने पर वे कहां शिकायत कर सकती हैं और उनकी शिकायत पर निष्पक्ष कार्रवाई होगी।
मुख्यमंत्री ने बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत गांवों, कस्बों और शहरों को बाल विवाह मुक्त बनाने के प्रयास तेज करने की जरूरत बताई।
उन्होंने इस दिशा में सरकारी विभागों के समन्वय के साथ स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर जोर दिया।
गुप्ता ने दिल्ली में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को बाल विवाह की समय रहते पहचान करने, प्रभावित परिवारों को परामर्श देने और जरूरी हस्तक्षेप करने से जोड़ने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।
गुप्ता ने दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों का जिक्र करते हुए डीटीसी बसों में बस मार्शल और पैनिक बटन की व्यवस्था, सीसीटीवी के जरिये अंधेरे और असुरक्षित स्थानों की पहचान, ‘स्पेशल बस’ में शाम की पाली के दौरान महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती तथा स्कूलों में आत्मरक्षा प्रशिक्षण का उल्लेख किया।
भाषा नोमान नोमान पवनेश
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