नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर (भाषा) रेलवे बोर्ड ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए 10 अक्टूबर को सुबह चार बजे से अपराह्न दो बजे के बीच नयी दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर पहुंचने वाली दर्जनों ट्रेनों को शुक्रवार को रद्द कर दिया। यह फैसला मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा प्रस्तावित बड़े विरोध प्रदर्शन से पहले किया गया।
रेलवे बोर्ड ने नौ अक्टूबर को दोपहर दो बजे के बाद अपने शुरुआती स्टेशनों से रवाना होने वाली और 10 अक्टूबर को सुबह चार बजे से दोपहर दो बजे के बीच नयी दिल्ली या हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पहुंचने वाली सभी यात्री ट्रेनों को रद्द कर दिया।
उत्तर रेलवे ने दावा किया कि निर्धारित अवधि के दौरान दोनों स्टेशनों पर पहुंचने वाली 165 ट्रेनों में से केवल 38 को रद्द किया गया है, जबकि बाकी सभी ट्रेनें सामान्य रूप से चलेंगी।
हालांकि, देर शाम उत्तर रेलवे ने 64 ट्रेनों की सूची जारी की, जिनमें मेल/एक्सप्रेस और लोकल ट्रेनें शामिल हैं। इन ट्रेनों को रद्द किया गया है। रेलवे की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
रेलवे विशेषज्ञों, यात्री संगठनों और मान्यता प्राप्त कर्मचारी महासंघों के एक वर्ग ने रेलवे बोर्ड के इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे ‘‘अभूतपूर्व’’, ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण’’ और ‘‘यात्रियों के हितों के खिलाफ’’ बताया है।
ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (एआईआरएफ) के महासचिव शिव गोपाल मिश्रा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘जहां तक मुझे याद है, भारतीय रेलवे के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि देश के किसी हिस्से में विरोध प्रदर्शन या आंदोलन के कारण इतनी बड़ी संख्या में ट्रेनें रद्द की गई हों। मैं इस दुर्भाग्यपूर्ण और यात्रियों के हितों के खिलाफ उठाए गए कदम की निंदा करता हूं।’’
उन्होंने कहा कि अचानक ट्रेनों के रद्द होने से हजारों यात्रियों को भारी परेशानी हुई है। इनमें से कई लोग जरूरी चिकित्सा कारणों, काम या पारिवारिक समारोहों सहित अन्य वजहों से यात्रा कर रहे होंगे।
मिश्रा ने कहा, ‘‘कोविड के दौरान लॉकडाउन के कारण ही ट्रेन सेवाएं बंद की गई थीं। इसके अलावा, इतने बड़े पैमाने पर ट्रेनें कभी रद्द नहीं की गईं, खासकर किसी विरोध प्रदर्शन के कारण।’’
देश के विभिन्न हिस्सों के यात्री संगठनों ने भी यात्रियों की परेशानियों को रेखांकित किया और रेलवे बोर्ड के फैसले को ‘‘बिना सोचे-समझे उठाया गया कदम’’ बताया, जिससे आम लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
नागपुर स्थित यात्री संगठन भारतीय यात्री केंद्र के सचिव बसंत कुमार शुक्ला ने कहा, ‘‘कई यात्री 60 दिन पहले टिकट बुक कराते हैं। वे अपनी यात्रा का इंतजार करते हैं, जिनमें से कई यात्राएं जरूरी होती हैं। इसके बावजूद अचानक बिना किसी उचित स्पष्टीकरण के ट्रेनें रद्द कर दी जाती हैं। अगर सरकार प्रदर्शनकारियों को दिल्ली आने से रोकना चाहती थी, तो यात्रियों को परेशान करने के बजाय वह कई अन्य उपाय अपना सकती थी।’’
उन्होंने मांग की कि रेलवे प्रभावित यात्रियों के लिए विशेष व्यवस्था करे या यदि वे दूसरी तारीखों पर यात्रा करना चाहें, तो टिकट बुकिंग में उन्हें प्राथमिकता दे।
कोयंबटूर जिला रेल यात्री कल्याण संघ के अध्यक्ष एम. जमील अहमद ने कहा कि प्रभावित यात्रियों की संख्या इतनी अधिक है कि इसका प्रतिकूल असर कई दिनों तक टिकटों की उपलब्धता पर भी पड़ेगा।
अहमद ने कहा, ‘‘मैं इसे बिना सोचे-समझे की गई त्वरित कार्रवाई कहूंगा, जिसमें यात्रियों के हितों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव पर विचार नहीं किया गया। राष्ट्रीय स्तर पर परिवहन सेवा देने वाले रेलवे से ऐसे कदम की उम्मीद नहीं थी।’’
कुछ विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि यदि रेलवे बोर्ड को वास्तव में यातायात अव्यवस्था की चिंता थी, तो वह इन ट्रेनों को नयी दिल्ली या हजरत निजामुद्दीन के सबसे नजदीकी स्टेशनों पर ही समाप्त कर सकता था। इससे जरूरी कारणों से यात्रा कर रहे यात्रियों को उन स्टेशनों से आगे की यात्रा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने का मौका मिल जाता।
रेलवे के एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने कहा, ‘‘इन ट्रेनों को रद्द करने का कोई तर्क नहीं है। रेलवे बोर्ड का एकमात्र उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को दिल्ली आने से रोकना था। दिल्ली से दूसरे गंतव्यों के लिए ट्रेनें बिना यातायात संबंधी किसी समस्या के चल रही हैं, लेकिन दूसरे स्टेशनों से यात्रा करने वाले यात्री दिल्ली नहीं पहुंच पा रहे हैं। यह अजीब तर्क है।’’
उन्होंने कहा कि ट्रेनों के रद्द होने से यात्रियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। कई यात्रियों को यह स्पष्ट नहीं है कि अपने गंतव्य की ओर जाते समय नयी दिल्ली या निजामुद्दीन से होकर गुजरने वाली ट्रेनें इन स्टेशनों पर रुकेंगी या बिना रुके आगे निकल जाएंगी।
उन्होंने कहा, ‘‘क्या ऐसी ट्रेनें नयी दिल्ली या निजामुद्दीन स्टेशन पर रुकेंगी? अगर वे नहीं रुकीं तो क्या होगा? इस अनिश्चितता से यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।’’
इस संबंध में उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘सुबह चार बजे से अपराह्न दो बजे के बीच नयी दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर कुल 165 ट्रेन पहुँचती हैं। इनमें से केवल 38 ट्रेन 10 अक्टूबर को इन स्टेशनों के आस-पास के इलाकों में भारी यातायात जाम की आशंका को देखते हुए रद्द की गई हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इन दो स्टेशनों के अलावा, बाकी सभी स्टेशनों - जैसे आनंद विहार टर्मिनल, सराय रोहिल्ला, पुरानी दिल्ली और दिल्ली छावनी - पर ट्रेन अपने तय समय पर ही आएंगी। बाकी सभी स्टेशनों पर ट्रेन परिचालन सामान्य रहेगा और केवल 38 ट्रेन ही प्रभावित होंगी।’’
प्रभावित रेलगाड़ियों में मगध एक्सप्रेस, राजेंद्र नगर टर्मिनल-नयी दिल्ली तेजस राजधानी एक्सप्रेस, संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस, राजेंद्र नगर टर्मिनल - नयी दिल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस, ट्रेन नंबर 12033 शताब्दी एक्सप्रेस, ट्रेन नंबर 12417 प्रयागराज एक्सप्रेस, ट्रेन नंबर 12275 हमसफर एक्सप्रेस समेत अन्य ट्रेन शामिल हैं।
उपाध्याय ने यह भी कहा कि दो ट्रेन अपने गंतव्य स्टेशन तक पहुंचने से पहले ही अपनी यात्रा समाप्त कर लेंगी।
इससे पहले, रेलवे बोर्ड ने सभी रेलवे जोन को एक लिखित संदेश भेजा, जिसमें कहा गया कि 10 अक्टूबर को सुबह चार बजे से अपराह्न दो बजे के बीच नयी दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर पहुँचने वाली सभी मेल और एक्सप्रेस ट्रेन रद्द कर दी जायेंगी।
संदेश में कहा गया था, “आज यानी नौ अक्टूबर को अपराह्न 2 बजे के बाद चलने वाली और 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से अपराह्न 2 बजे के बीच नयी दिल्ली या हजरत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन पहुँचने वाली सभी मेल/एक्सप्रेस ट्रेन उनके शुरुआती स्टेशन पर ही रद्द कर दी जानी चाहिए।’’
बोर्ड ने इस निर्णय की वजह के तौर पर दोनों स्टेशनों के बीच सड़क पर अप्रत्याशित यातायात जाम का भी हवाला दिया था।
कॉजपा ने शनिवार को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। वह मतदाता सूची के विशेष गहन परीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है।
पुलिस ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) से 57 मेट्रो स्टेशन बंद करने का आग्रह किया है, ताकि युवाओं को विरोध-प्रदर्शन वाली जगह पर पहुँचने से रोका जा सके।
भाषा रंजन दिलीप
दिलीप