नयी दिल्ली, 22 जून (भाषा) राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने देश में सभी स्नातकोत्तर (पीजी) डिप्लोमा मेडिकल पाठ्यक्रमों को चरणबद्ध तरीके से बंद करके उन्हें डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (एमडी) और मास्टर ऑफ सर्जरी (एमएस) जैसे स्नातकोत्तर व्यापक-विशेषज्ञता वाले डिग्री कार्यक्रम से बदलने का निर्णय लिया है।
एनएमसी ने सोमवार को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी मेडिकल कॉलेज और संस्थानों को भेजे पत्र में कहा कि शैक्षणिक वर्ष 2026-27 स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अंतिम वर्ष होगा। इसमें कहा गया है कि इसके बाद 2027-28 से इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी और धीरे-धीरे ये पूरी तरह बंद हो जाएंगे।
एनएमसी ने सभी संस्थानों को स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा बोर्ड (पीजीएमईबी) द्वारा 19 जून को जारी सार्वजनिक नोटिस के प्रावधानों का पालन करने का निर्देश दिया है।
पीजीएमईबी ने अपने नोटिस में कहा कि स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रमों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने करने का यह निर्णय ‘‘स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा को मानकीकृत करने, विशेषज्ञ प्रशिक्षण की गुणवत्ता और मान्यता बढ़ाने तथा स्नातकोत्तर योग्यता को मौजूदा शैक्षणिक मानक के हिसाब से करने और मौजूदा संस्थागत क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने' के लिए लिया गया है।’’
बोर्ड ने कहा कि कई मेडिकल कॉलेज स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम और एमडी/एमएस दोनों पाठ्यक्रम एक ही विशेषज्ञता में संचालित कर रहे हैं, जबकि कुछ संस्थानों में केवल डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं, जबकि उनके पास डिग्री कार्यक्रम चलाने के लिए आवश्यक ढांचा, फैकल्टी और क्लीनिकल सुविधाएं मौजूद हैं।
एनएमसी ने कहा, ‘‘सभी स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रमों को समाप्त करके उन्हें स्नातकोत्तर व्यापक-विशेषज्ञता डिग्री पाठ्यक्रमों (एमडी/एमएस) में परिवर्तित किया जाएगा।’’
भाषा अमित दिलीप
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