(पांचवें पैरा में आंकड़ा ठीक करते हुए.. रिपीट)
नयी दिल्ली, 13 मई (भाषा) केंद्र सरकार ने बुधवार को कोयले से गैस बनाने की परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करना है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यहां संवाददाताओं से कहा कि कोयला गैसीकरण योजना के लिए 37,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और इसके तहत करीब तीन लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत 7.5 करोड़ टन कोयले के गैसीकरण से जुड़ी परियोजनाएं लगाई जाएंगी।
वैष्णव ने कहा कि देश के पास लगभग 401 अरब टन का ज्ञात कोयला भंडार है, जो अगले 200 साल की जरूरतों के लिए पर्याप्त है।
उन्होंने कहा, “मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए आत्मनिर्भर बनने के लिए इस तरह के फैसले जरूरी हैं। इसी संदर्भ में कोयले से गैस बनाने को लेकर बड़ा निर्णय लिया गया है।”
कोयला गैसीकरण एक प्रक्रिया है, जिसमें ठोस ईंधन को 'कृत्रिम गैस' (सिनगैस) में बदला जाता है। इस गैस का उपयोग वैकल्पिक ईंधन के रूप में होता है और इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है।
सिनगैस के जरिये मेथनॉल, उर्वरक, हाइड्रोजन और विभिन्न रसायनों का उत्पादन संभव होता है, जिससे आयातित कच्चे तेल (करीब 83 प्रतिशत), मेथनॉल (90 प्रतिशत से अधिक) और अमोनिया (13-15 प्रतिशत) पर निर्भरता घटाई जा सकती है।
सरकार का लक्ष्य 2030 तक 10 करोड़ टन की कोयला गैसीकरण क्षमता हासिल करने का है। यह योजना सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं में तेजी लाने, एलएनजी, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट, अमोनिया और कोकिंग कोयले जैसे महत्वपूर्ण आयातित संसाधनों पर निर्भरता कम करने और घरेलू संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाई गई है।
देश की ऊर्जा जरूरतों में कोयले की अहम भूमिका बनी हुई है और यह देश के कुल ऊर्जा मिश्रण में 55 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखता है। दुनिया में कोयले का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश होने से भारत में ऊर्जा मांग बढ़ने के साथ कोयले की खपत भी बढ़ने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गैसीकरण प्रौद्योगिकी देश के विशाल कोयला भंडार के स्वच्छ और कुशल उपयोग का अवसर प्रदान करती है।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
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