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राजनीतिक दलों में यौन उत्पीड़न कानून लागू होने संबंधी सवाल पर सरकार का सीधा जवाब देने से परहेज

नयी दिल्ली, चार फरवरी (भाषा) महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बुधवार को राज्यसभा में आप सांसद स्वाति मालीवाल के इस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया कि क्या कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से संबंधित कानून राजनीतिक दलों में कार्यरत महिलाओं पर भी लागू होते हैं। हालांकि मंत्रालय ने कहा कि कानून के तहत परिभाषाएं ‘समावेशी’ हैं।

मालीवाल ने सवाल किया था कि क्या सरकार यह मानती है कि भले ही राजनीतिक दलों में महिलाओं को 'कर्मचारी' के रूप में वर्गीकृत न किया गया हो, लेकिन वे अनिवार्य आंतरिक शिकायत समितियों (आईसीसी) के अभाव में यौन उत्पीड़न के लिहाज से कमजोर बनी रहती हैं?

उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या मंत्रालय द्वारा भारतीय निर्वाचन आयोग और राजनीतिक दलों के साथ कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) (पॉश) अधिनियम, 2013 के अंतर्गत सुरक्षा तंत्रों के विस्तार या समकक्ष संस्थागत ढांचे के निर्माण के संबंध में कोई परामर्श किया है।

इसके जवाब में महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ कानूनों के प्रावधानों का जिक्र किया।

उन्होंने कहा, ‘‘कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न समानता, जीवन और स्वतंत्रता के महिलाओं के मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है... ऐसे कृत्य असुरक्षित माहौल बनाते हैं, कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी में बाधा डालते हैं और उनके आर्थिक सशक्तीकरण और समावेशी विकास के लक्ष्य को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करते हैं।”

उन्होंने कहा कि कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 सभी महिलाओं को, उम्र या रोजगार की स्थिति की परवाह किए बिना, कवर करता है और घरेलू कामगारों सहित संगठित या असंगठित, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के कार्यस्थलों को सुरक्षा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि यह कानून “समावेशी” है।

मंत्री ने अपने जवाब में केरल उच्च न्यायालय के 2022 के एक फैसले का भी हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि 'राजनीतिक दल, जिनका अपने सदस्यों के साथ कोई नियोक्ता-कर्मचारी संबंध नहीं है और जो अधिनियम के तहत परिभाषित 'कार्यस्थल' के रूप में कोई निजी उद्यम, उपक्रम, संस्था, प्रतिष्ठान आदि नहीं चला रहे हैं, वे किसी भी आंतरिक शिकायत समिति का गठन करने के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

भाषा अविनाश संतोष

संतोष