नयी दिल्ली, चार फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने देश के सभी उच्च न्यायालयों से जमानत से जुड़े लंबित मामलों के बारे में रिपोर्ट मांगते हुए बुधवार को कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता के लिए दायर याचिकाओं की शीघ्र सुनवाई न होना निराशाजनक है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा विपुल एम पंचोली की पीठ ने उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरलों को सभी जमानत याचिकाओं का विवरण प्रदान करने का निर्देश दिया।
इन जमानत याचिकाओं में इस वर्ष एक जनवरी के बाद दाखिल किए गए नियमित और अग्रिम आवेदन भी शामिल हैं।
पीठ ने कहा कि याचिका दाखिल करने की तारीख, अगली सुनवाई की तारीख और यदि कोई निर्णय हो तो उसकी तारीख उपलब्ध कराई जानी चाहिए। साथ ही, उसने जनवरी 2025 से पहले दायर की गई लंबित जमानत याचिकाओं का विवरण भी मांगा।
उच्चतम न्यायालय ने कहा, ‘‘ हमें यह देखकर बेहद निराशा हुई है कि व्यक्तियों की स्वतंत्रता से संबंधित प्रार्थनाओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लंबित मामलों की संख्या चाहे कितनी भी अधिक हो और विचारणीय मामले भी हों, लेकिन जमानत की प्रार्थना से अधिक महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं हो सकता।’’
शीर्ष अदालत ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में लंबित जमानत मामले में सुनवाई स्थगित करने से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया।
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