प्रयागराज (उप्र), चार फरवरी (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों (एनएलयू) के ‘कंसोर्टियम’ को ‘क्लैट यूजी 2026’ के लिए संशोधित मेधा सूची बनाने का निर्देश दिया।
हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि पहले दौर की काउंसलिंग के दौरान प्रवेश ले चुके विद्यार्थियों को परेशान नहीं किया जाएगा। ‘क्लैट-2026’ की परीक्षा सात दिसंबर, 2025 को हुई थी।
न्यायमूर्ति विवेक सरन ने क्लैट परीक्षा में शामिल हुए छात्र अवनीश गुप्ता की याचिका आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया।
अदालत ने यह आदेश इसलिए दिया क्योंकि उच्च अधिकार प्राप्त “निरीक्षण समिति” ने एक विवादित प्रश्न के संबंध में विषय के विशेषज्ञों की राय मनमाने ढंग से नहीं मानी और इसके लिए कोई कारण भी नहीं बताया।
याचिकाकर्ता ने ‘टेस्ट बुकलेट-सी’ के प्रश्न संख्या 6, 9 और 13 के उत्तर को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था। यद्यपि अदालत ने प्रश्न संख्या छह और 13 को लेकर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, लेकिन प्रश्न संख्या नौ के संबंध में निर्देश दिया कि “बी” और “डी” दोनों विकल्पों को सही उत्तर माना जाए।
अदालत ने कहा, “इस तरह के मामले में प्रतिवादी (एनएलयू के कंसोर्टियम) को प्रश्न संख्या नौ के संबंध “बी” और “डी” दोनों विकल्पों को सही उत्तर मानते हुए संशोधित मेधा सूची तैयार करने का निर्देश दिया जाता है।”
अदालत ने कहा कि संशोधित मेधा सूची को आज से एक महीने के भीतर पुनः प्रकाशित किया जाए।
भाषा सं राजेंद्र राजकुमार
राजकुमार