नयी दिल्ली, चार फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने वित्तीय प्रलोभन और ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए भ्रामक संदेशों और लिंक के प्रसार से जुड़े अपराधों में वृद्धि का संज्ञान लिया है और कहा है कि ये लोगों के विश्वास और डिजिटल सुरक्षा के लिहाज से गंभीर खतरा हैं।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने धोखाधड़ी के लिए फर्जी तरीके से सिम कार्ड प्राप्त करने की एक बड़ी साजिश के ‘‘मुख्य सूत्रधार’’ होने के आरोपी दो व्यक्तियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।
अदालत ने कहा कि चक्षु मॉड्यूल और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से प्राप्त शिकायतों से पता चला है कि दो आरोपियों द्वारा नियंत्रित एक कंपनी को जारी किए गए कई सिम नंबरों का उपयोग ऋण, स्वीकृत क्रेडिट और वित्तीय प्रलोभनों से संबंधित भ्रामक संदेशों को प्रसारित करने के लिए किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप लोगों को आर्थिक नुकसान हुआ।
अदालत ने कहा कि जांच अभी शुरुआती दौर में है और पूरी साजिश का खुलासा करने के लिए आरोपियों से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
अदालत ने 21 जनवरी को पारित अपने आदेश में कहा, ‘‘आरोपों की गंभीरता, जांच के दौरान एकत्र की गई सामग्री की प्रकृति और दूरसंचार अवसंरचना के दुरुपयोग से जुड़े अपराधों में आवेदकों के प्रथम दृष्टया संबंध को देखते हुए, न्यायालय को आवेदकों को अग्रिम जमानत की असाधारण सुरक्षा प्रदान करने का कोई आधार नहीं मिलता है।’’
इसमें कहा गया है, ‘‘इस न्यायालय का मानना है कि वित्तीय प्रलोभनों के लिए भ्रामक संदेशों और लिंक के प्रसार तथा ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े अपराध बढ़ रहे हैं और लोगों के विश्वास तथा डिजिटल सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं।’’
सीबीआई ने अग्रिम जमानत की अर्जी का विरोध किया।
एजेंसी के वकील ने बताया कि हजारों सिम कार्ड जानबूझकर गलत अंतिम उपयोगकर्ता विवरण प्रदान करके और केवाईसी प्रक्रिया का दुरुपयोग करके प्राप्त किए गए थे।
इसने तर्क दिया कि इस अपराध का समाज पर गंभीर प्रभाव पड़ता है और इससे डिजिटल सुरक्षा कमजोर होती है।
भाषा
देवेंद्र संतोष
संतोष