बेंगलुरु, चार फरवरी (भाषा) भाजपा और उसकी सहयोगी जद (एस) के सदस्यों के बहिर्गमन के बीच कर्नाटक विधानसभा ने बुधवार को केंद्र से ‘विकसित भारत - जी राम जी’ अधिनियम को तुरंत रद्द करने और मनरेगा को फिर से लागू करने का आग्रह करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया।
यह प्रस्ताव मंगलवार को मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने पेश किया था, जिसे आज सदन ने मंजूरी प्रदान की।
प्रस्ताव में कहा गया है कि केंद्र द्वारा ‘‘मनमाने’’ तरीके से लागू किया गया ‘विकसित भारत - जी राम जी’ अधिनियम ‘‘संघवाद के बुनियादी आदर्शों और ग्रामीण लोगों की आजीविका के अधिकार के लिए हानिकारक है।’’
प्रस्ताव पारित होने के बाद, विधानसभा अध्यक्ष यू टी खादर ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।
विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा कि भाजपा सत्ताधारी कांग्रेस द्वारा लाए गए प्रस्ताव का विरोध करती है और विकसित भारत - रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी - जी राम जी) का समर्थन करती है।
बहिर्गमन से पहले अशोक ने प्रस्ताव की प्रति फाड़ दी और उसे सदन में फेंक दिया।
उन्होंने भाजपा की यह मांग भी दोहराई कि राजस्व मंत्री आर बी तिम्मापुर को इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि राजस्व विभाग में ‘‘6,000 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है।’’
भाजपा नेता ने मंगलवार को आरोप लगाया था कि ‘घोटाले’ के पैसे का इस्तेमाल चुनावी राज्यों में कांग्रेस के वित्त पोषण के लिए किया गया था। भाजपा ने मंगलवार को कर्नाटक विधानसभा के अंदर रात भर विरोध प्रदर्शन किया, जो बुधवार को भी जारी रहा।
पार्टी ने विधानसभा में नारे लगाए और कार्यवाही में बाधा डाली, और तिम्मापुर के इस्तीफे की मांग की।
सत्तारूढ़ कांग्रेस ने विपक्ष की मांग को खारिज कर दिया और कहा कि तिम्मापुर के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं हैं।
भाषा शफीक पवनेश
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