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भारत ने संयुक्त राष्ट्र सामाजिक विकास आयोग में अधिकार आधारित, समावेशी विकास मॉडल को रेखांकित किया

नयी दिल्ली, चार फरवरी (भाषा) भारत ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र की एक चर्चा में अपने अधिकार आधारित, समावेशी और जन-केंद्रित विकास मॉडल पर जोर दिया।

यह चर्चा सामाजिक विकास के दूसरे विश्व शिखर सम्मेलन के परिणामों का उपयोग करने तथा कोपेनहेगन घोषणा को दोहा राजनीतिक घोषणा से जोड़ने पर केंद्रित थी।

महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने भारत की ओर से बयान देते हुए इस बात पर प्रकाश डाला कि सामाजिक न्याय 'विकसित भारत 2047' के लिए भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण का मूल आधार है।

उन्होंने याद दिलाया कि कोपेनहेगन घोषणा ने विकास के केंद्र में लोगों को रखा, जबकि दोहा राजनीतिक घोषणा ने उभरती वैश्विक चुनौतियों के बीच इस प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

ठाकुर ने इस बात पर और जोर दिया कि भारत का 'सबका साथ, सबका विकास' का शासन दर्शन एक व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें सरकार और समाज दोनों शामिल हैं, जिसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए गरिमा, समानता और अवसर सुनिश्चित करना है।

भारत की व्यापक सामाजिक सुरक्षा पहलों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि 80 करोड़ से अधिक लोग खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों के अंतर्गत आते हैं, जबकि 55 करोड़ से अधिक नागरिक देशव्यापी स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों के नेटवर्क द्वारा प्रदान की जाने वाली मुफ्त स्वास्थ्य सेवा से लाभान्वित होते हैं।

उन्होंने कहा कि 16,000 से अधिक जन आरोग्य केंद्रों के माध्यम से सस्ती दवाएं और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

भाषा शुभम सुरेश

सुरेश