प्रयागराज (उप्र), चार फरवरी (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वृंदावन-मथुरा में ठाकुर श्री बांके बिहारी जी महाराज मंदिर में दर्शन का समय बढ़ाने के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित की गयी उच्चाधिकार प्राप्त मंदिर प्रबंधन समिति के खिलाफ दायर अवमानना याचिका खारिज कर दी है।
उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति अशोक कुमार की अगुवाई में आठ अगस्त, 2025 को इस समिति का गठन किया था।
गौरव गोस्वामी की अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया था कि दर्शन का समय बढ़ाना, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के नवंबर, 2022 के आदेश का उल्लंघन है।
न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने पाया कि उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित समिति ने बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए दर्शन का समय बढ़ाने का निर्णय लिया था।
वहीं, अवमानना याचिका में दलील दी गई कि जब उच्च न्यायालय ने मथुरा की दीवानी अदालत के आदेश (नवंबर, 2022) पर रोक लगा दी थी तो उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित समिति दर्शन का समय नहीं बढ़ा सकती।
मथुरा की दीवानी अदालत ने जिला मजिस्ट्रेट और जिला जज के बीच बातचीत के आधार पर दर्शन का समय बढ़ाने का प्रयास किया था जिस पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी थी।
इसके बाद, यह मामला उच्चतम न्यायालय पहुंचा जिसने एक उच्च अधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति का गठन कर दिया। इस समिति को मंदिर के बाहर और भीतर दिन प्रतिदिन के कामकाज पर नजर रखने का काम सौंपा गया। समिति ने 11 सितंबर, 2025 को एक बैठक की और दर्शन का समय बढ़ाने का एक प्रस्ताव पारित किया।
इसके परिणाम स्वरूप, मथुरा के जिला मजिस्ट्रेट ने दर्शन का समय बढ़ाने के लिए 19 सितंबर, 2025 को एक आधिकारिक ज्ञापन जारी किया।
भाषा सं राजेंद्र राजकुमार
राजकुमार