बेंगलुरु, चार फरवरी (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने बुधवार को केंद्र सरकार पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को ‘चुप कराने की कोशिश’ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह भारत के लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर प्रहार है।
वह राहुल गांधी को लोकसभा में पूर्व सेना प्रमुख एम. एम. नरवणे के 2020 के भारत-चीन संघर्ष पर लिखे गए एक अप्रकाशित संस्मरण का हवाला देने वाले लेख को उद्धृत करने से रोके जाने के संदर्भ में जिक्र कर रहे थे।
सिद्धरमैया ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘संसद में विपक्ष के नेता को चुप कराने के मोदी सरकार के बार-बार किए जा रहे प्रयास बेहद चिंताजनक हैं और भारत के लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर चोट करते हैं।’’
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने नरवणे द्वारा लिखित पुस्तक ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के अंशों के आधार पर राष्ट्रीय सुरक्षा पर वैध प्रश्न उठाए हैं, लेकिन यह पुस्तक भारत सरकार द्वारा प्रकाशित किए जाने से रोके जाने के कारण अप्रकाशित है, जबकि इसे 2024 में ही प्रकाशित किया जाना चाहिए था।
उन्होंने कहा, “ये अंश हाल ही में ‘द कारवां’ पत्रिका के एक लेख में उद्धृत किए गए थे। महत्वपूर्ण बात यह है कि जनरल नरवणे ने अपने नाम से कही गई बातों का खंडन नहीं किया है। इसके विपरीत उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उनकी पुस्तक सरकारी मंजूरी की प्रतीक्षा कर रही है।’’
सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘अगर ये बयान गलत या भ्रामक होते तो सरकार स्पष्ट खंडन जारी कर सकती थी। इसके बजाय किताब को रोककर और इस पर चर्चा को चुप कराकर सरकार का फैसला इस संदेह को और गहरा करता है कि कड़वी सच्चाइयों को दबाया जा रहा है।’’
उन्होंने कहा कि यह पुस्तक इंगित करती है कि 2020 में चीन सीमा पर हुए गतिरोध के महत्वपूर्ण चरण के दौरान मोदी सरकार स्पष्ट और निर्णायक रणनीतिक फैसले लेने में ‘‘विफल’’ रही, जिससे सशस्त्र बलों को व्यापक बाधाओं के भीतर एक जटिल राजनीतिक संकट का प्रबंधन करने के लिए छोड़ दिया गया।
उन्होंने आगे कहा, “यह सेना की किसी विफलता की ओर नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और तत्कालीन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में शीर्ष स्तर पर मजबूत राजनीतिक नेतृत्व की कमी की ओर इशारा करता है।”
उन्होंने कहा, “संसद में ऐसे मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए। राहुल गांधी ने वही किया जो विपक्ष के एक जिम्मेदार नेता का कर्तव्य होता है- जनता की ओर से सवाल पूछे। उन्होंने न तो देश के खिलाफ बात की और न ही सशस्त्र बलों के खिलाफ।’’
भाषा यासिर शफीक सुरेश
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