नयी दिल्ली, चार फरवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने संपत्ति विवाद में हमला एवं तेजाब फेंकने के आरोपी एक ही परिवार के तीन सदस्यों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे जाकर इसे साबित करने में विफल रहा।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पूजा तलवार ने मृदुल, रजनी और यशपाल को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 341 (गलत तरीके से रोकना), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना) और 34 (सामान्य इरादा) के तहत आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने यशपाल को धारा 326बी (किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने के इरादे से स्वेच्छा से तेजाब फेंकना) के तहत आरोप से भी बरी कर दिया।
अदालत ने 30 जनवरी को अपने फैसले में आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के अपराध को संदेह से परे जाकर साबित नहीं कर पाया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पांच नवंबर, 2015 की सुबह, शिकायतकर्ता के भाई सोहन लाल और यशपाल, अपनी भाभी योगमाया के साथ नाली की समस्या को लेकर बहस कर रहे थे, तभी अचानक सोहन लाल, यशपाल और चोखे लाल उसके कमरे में घुस आए और संपत्ति विवाद को लेकर उस पर और उसके पति जीत प्रसाद पर हमला कर दिया।
अभियोजन पक्ष का कहना है कि जब प्रसाद ने भागने की कोशिश की, तो शिकायतकर्ता के भाइयों और उसकी भाभी रजनी और मृदुल ने उसे रोक लिया एवं उस पर और हमला किया। शिकायत में कहा गया है कि यशपाल ने कथित तौर पर उस पर तेजाब फेंका और वह तरल पदार्थ फर्श पर फैल गया।
अदालत ने कहा कि कथित घटना पांच नवंबर, 2015 को हुई, लेकिन प्राथमिकी 21 नवंबर, 2015 को ही दर्ज की गई थी । अदालत ने देरी के लिए दिए गए स्पष्टीकरण को असंतोषजनक पाया।
भाषा
राजकुमार पवनेश
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