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समाजशास्त्री आंद्रे बेते का 91 वर्ष की आयु में निधन

नयी दिल्ली, चार फरवरी (भाषा) प्रख्यात समाजशास्त्री और लेखक आंद्रे बेते का मंगलवार रात वृद्धावस्था संबंधी बीमारी के कारण यहां एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 91 वर्ष के थे।

उनकी बेटी राधा बेते ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया,‘‘मेरे पिता कुछ समय से बीमार थे और अस्पताल में भर्ती थे, जहां कल रात उनका निधन हो गया।’’

आंद्रे बेते का अंतिम संस्कार बुधवार को किया गया।

आंद्रे बेते 2003 से दिल्ली विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के ‘प्रोफेसर एमेरिटस’ थे। वह भारत में जाति व्यवस्था और सामाजिक असमानताओं पर अपने अध्ययनों के लिए जाने जाते हैं।

पश्चिम बंगाल में जन्मे आंद्रे बेते कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली में रहने लगे। उनके पिता फ्रांसीसी थे जबकि मां भारतीय थीं।

आंद्रे बेते ने राजनीतिक समाजशास्त्र से लेकर धर्म के समाजशास्त्र तक विभिन्न विषयों पर आधारित कई पुस्तकें लिखीं।

साहित्य और शिक्षा में उनके योगदान के लिए उन्हें 2005 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने बेते को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें 'नैतिक और बौद्धिक आधार स्तंभ' बताया।

गुहा ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ‘‘यह जानकर बेहद दुख हुआ कि महान समाजशास्त्री आंद्रे बेते अब हमारे बीच नहीं रहे। वह मेरे (और कई अन्य लोगों) के लिए सबसे प्रशंसित भारतीय विद्वान थे, एक नैतिक और बौद्धिक आधार स्तंभ थे।’’

अशोका विश्वविद्यालय ने 'एक्स' पर पोस्ट किया कि आंद्रे बेते ने 'बुद्धिमत्ता, ईमानदारी और शैक्षणिक उत्कृष्टता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता' के साथ विश्वविद्यालय के शासी निकाय का नेतृत्व किया।

आंद्रे बेते 2014 से 207 तक अशोका विश्वविद्यालय के कुलाधिपति रहे थे।

हैदराबाद विश्वविद्यालय ने आंद्रे बेते के निधन पर शोक व्यक्त किया। आंद्रे बेते को 2013 में विश्वविद्यालय के 15वें दीक्षांत समारोह में डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया था।

भाषा

शुभम राजकुमार

राजकुमार