नयी दिल्ली, चार फरवरी (भाषा) सरकार ने बुधवार को राज्यसभा को बताया कि 28 जनवरी तक 2,930 करोड़ रुपये मूल्य की चल एवं अचल शत्रु संपत्तियां बेची गयी हैं।
पाकिस्तान और चीन की नागरिकता लेने वाले लोगों (ज्यादातर 1947 से 1962 के बीच) द्वारा छोड़ी गई संपत्तियों को शत्रु संपत्ति कहा जाता है।
गृह राज्य मंत्री बी संजय कुमार ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उच्च सदन को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शत्रु संपत्तियों का निपटान और मुद्रीकरण शत्रु संपत्ति कानून, 1968 के प्रावधानों और उसमें बनाए गए नियमों तथा दिशानिर्देशों के अनुसार किया जाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘28 जनवरी 2026 तक 2930 करोड़ रुपये मूल्य की चल एवं अचल शत्रु संपत्तियां बेची जा चुकी हैं।’’
कुमार ने कहा कि सरकार ने शत्रु संपत्तियों के मुद्रीकरण में तेजी लाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें जिलाधिकारियों को ऐसी संपत्तियों का पदेन उप-संरक्षक, उप जिलाधिकारी को पदेन सहायक संरक्षक, तहसीलदार को पदेन निरीक्षक नियुक्त करना शामिल है।
शत्रु संपत्ति नीलामी में बोली लगाने वालों को आकर्षित करने के लिए, बोली-पूर्व जमा राशि 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई है और बिक्री मूल्य के भुगतान की अवधि 21 दिनों से बढ़ाकर 120 दिन कर दी गई है।
भाषा अविनाश सुभाष
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