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रेलगाड़ियों की समय पाबंदी 2021-22 में 90 प्रतिशत तक पहुंचने के बाद कम हुई: सरकार

नयी दिल्ली, चार फरवरी (भाषा) संसद की एक समिति ने पाया कि ट्रेनों के आवागमन संबंधी समय पाबंदी में कमी आई है और यह 2021-22 में 90 प्रतिशत से घटकर 2024-25 में 78.67 प्रतिशत रह गई। समिति ने ट्रेनों की आवाजाही का समय दर्ज करने के भारतीय रेलवे के तरीके को ‘भ्रामक’ बताया।

संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) ने बुधवार को लोकसभा में पेश अपनी रिपोर्ट ‘‘भारतीय रेलवे में ट्रेन संचालन में समय की पाबंदी और यात्रा का समय’’ में सभी प्रकार की ट्रेनों के समय की पाबंदी का अध्ययन किया और इसे बेहतर बनाने के लिए कई उपाय सुझाए।

इसमें बताया गया कि 2015-16 में ट्रेनों की समय पाबंदी 77.51 प्रतिशत थी, जबकि 2018-19 में यह 69.23 प्रतिशत और 2021-22 में काफी सुधार के साथ 90.48 प्रतिशत हो गई।

समिति ने पाया कि 2023-24 में समय की पाबंदी का प्रदर्शन फिर से घटकर 73.62 प्रतिशत हो गया, जिसके बाद 2024-25 में (अगस्त तक) इसमें कुछ सुधार होकर यह 78.67 प्रतिशत हो गया।

समय की पाबंदी को रिकॉर्ड करने के तरीकों पर सवाल उठाते हुए, रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘समिति ऑडिट देखकर यह संज्ञान लेती है कि भारतीय रेलवे ट्रेनों की समय की पाबंदी को उन स्टेशनों पर मापता है जहां यात्रा समाप्त होती है। जबकि, अन्य देशों में, इसे शुरुआती बिंदु, बीच के स्टेशन और अंतिम स्टेशनों पर मापा जाता है।’’

उसने कहा, ‘‘इसके अलावा, समय की पाबंदी को मापने के लिए, भारतीय रेलवे निर्धारित समय के संदर्भ में 15 मिनट की देरी की छूट देता है।’’

रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने यह भी संज्ञान लिया कि समय की पाबंदी को मापने के लिए वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाएं बहुत सख्त मानदंड को दर्शाती हैं, क्योंकि जापान में पैमाना सेकंड में है, और निर्धारित समय से पहले ट्रेन के पहुंचने को भी खामी माना जाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘समिति का विचार है कि समय की पाबंदी की निगरानी के लिए यह संकीर्ण दृष्टिकोण रास्ते में होने वाली देरी को ध्यान में रखने में विफल रहता है, जिससे वास्तविक आवाजाही की एक अधूरी और अक्सर गुमराह करने वाली तस्वीर सामने आती है।’’

कमेटी ने सिफारिश की कि भारतीय रेलवे मौजूदा अंतिम स्टेशन के साथ-साथ प्रारंभिक और बीच के स्टेशनों पर समेकित निगरानी के जरिए समय की पाबंदी के मूल्यांकन की समीक्षा और उसमें सुधार करे।

समिति ने भारतीय रेलवे द्वारा शुरू की गई ईएममू/मेमू ट्रेनों की प्रभावशीलता की सराहना की और सिफारिश की कि इष्टतम गति प्राप्त करने के लिए हर स्टेशन पर रुकने वाली ट्रेनों को डेमू और मेमू में बदलने की प्रक्रिया में तेज़ी लाई जाए और इसे सभी रेलवे ज़ोन में लागू किया जाए।

भाषा वैभव अविनाश

अविनाश