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उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को वांगचुक की हिरासत पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया

नयी दिल्ली, चार दिसंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को केंद्र सरकार से पूछा कि क्या इस बात की संभावना है कि वह जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उनकी हिरासत पर विचार कर सकती है।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी.बी वराले की पीठ ने कहा कि वांगचुक की स्वास्थ्य रिपोर्ट ठीक नहीं है और केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम नटराज को इस मामले में निर्देश लेने चाहिए।

अदालत ने कहा, “दलीलों, जवाबी दलीलों और कानूनी पहलुओं के अलावा अदालत का एक अधिकारी होने के अलावा इस बात पर भी विचार करें।”

लगभग पांच महीने पहले 26 सितंबर 2025 को हिरासत संबंधी आदेश जारी किया गया था।

पीठ ने कहा, “हिरासत में लिए गए व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर विचार करते समय हमने जो रिपोर्ट देखी है, उससे पता चलता है कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है। कुछ आयु संबंधी और कुछ दूसरी समस्याएं हैं। क्या सरकार की ओर से पुनर्विचार किए जाने की कोई संभावना है?”

नटराज ने कहा कि संबंधित प्राधिकारियों से सुझाव लेंगे।

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वांगचुक पिछले साल लेह में हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं, जिसमें चार लोगों की मौत हुई और 161 लोग घायल हुए।

उन्होंने कहा, “अंतत: उनके भड़काऊ भाषण, उकसावे के कारण यह सब हुआ। व्यक्ति का सक्रिय रूप से भाग लेना आवश्यक नहीं होता, व्यक्तियों के समूह को प्रभावित करना ही पर्याप्त होता है।”

नटराज ने कहा कि वांगचुक के हिरासत आदेश को तीन अक्टूबर 2025 को मंजूरी दी गई और मंजूरी के आदेश को कोई चुनौती नहीं दी गई।

अदालत में दलीलें पेश की जानी बृहस्पतिवार को भी जारी रहेंगी।

शीर्ष अदालत राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) जैसे कठोर कानून के तहत वांगचुक की हिरासत के खिलाफ दायर उनकी पत्नी गीताांजलि जे. आंग्मो की याचिका पर सुनवाई कर रही है।

लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत होने के दो दिन बाद 26 सितंबर को वांगचुक को हिरासत में लिया गया था।

भाषा जोहेब सुभाष

सुभाष