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कैसे हुई प्रियंका की मौत? पोस्टमार्टम में नहीं पता लग पाई वजह, डीएनए से होगी कंकाल की जांच

Meerut: सदर बाजार के तेली मोहल्ला निवासी 34 वर्षीय प्रियंका बिश्वास की मौत कैसे हुई पोस्टमार्टम में इस बात का पता नहीं लग पाया है। जो रिपोर्ट पुलिस को मिली है, उसमें प्रियंका के शरीर पर कोई चोट पर घाव के निशान नहीं मिले हैं।

डॉक्टर को कहना है कि प्रियंका का शव लगभग कंकाल के रूप में मिला है। उस पर ज्यादा मांस और स्क्रीन नहीं थी। जिस से कुछ ज्यादा पता लग सके। डॉक्टर का कहना है कि अब उसकी हड्डी से DNA लेकर आगे की जांच की जाएगी। वहीं पुलिस प्रियंका के मोबाइल तलाश में लगी है। जिसको लेकर के प्रियंका के पिता उदय भान बिश्वास को पुलिस हरिद्वार लेकर गई है। जहां वह रुका हुआ था। पुलिस मोबाइल को कब्जे में लेकर जांच करेगी कि आखिर किस-किस से और कब-कब बात हुई।

आपको बता दें बीते शुक्रवार को सदर बाजार के तेली मोहल्ले में रहने वाली प्रियंका का शव घर के अंदर ही कंकाल अवस्था में बरामद हुआ था। प्रियंका का शव उसके पिता उदयभान घर में रखकर ही चार महीने पहले ताला लगाकर लापता हो गए थे। बताया जा रहा है कि उदयभान कुछ दिनों तक शव के साथ में रहे और लाश की दुर्गंध छुपाने के लिए उन्होंने परफ्यूम स्प्रे भी छिड़का। बताया जा रहा है कि दिसंबर में पिता हरिद्वार जाकर रहने लगे।

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। प्रियंका के शरीर के करीब 80% अंग नष्ट हो चुके थे। इस पर पोस्टमार्टम के लिए लगभग कुछ नहीं बचा था और मृत्यु का समय और कारण पता नहीं चल सका है। ऐसे में अब मामला उदयभान से पूछताछ और पुलिस छानबीन पर आकर टिक गया है। शव पुराना होने के कारण शरीर के सभी अंग नष्ट हो गए थे। ऐसे में प्रियंका की मौत की कहानी अभी उलझी हुई है।

इस मामले पर हमने जब मेरठ के सीएमओ डॉ अशोक कटारिया से बात की तो उन्होंने बताया कि कई महीने पुरानी शव था। जो हमारे पास पुलिस द्वारा बॉडी लाई गई वो केवल कंकाल रूप में बची हुई थी। बाकी मांस या स्किन वगैरा कोई उसमें ज्यादा थी नहीं। शव का पोस्टमार्टम किया जा चुका है। उसमें कोई सैंपल लेने लायक कोई चीज उसमें थी नहीं। लेकिन हड्डी का सैंपल हमने विधिक प्रयोगशाला में भेजा है। ताकि यह पता लग सके की यह उसी लड़की का सैंपल है या नहीं है। DNA सैंपल उसका विधिक प्रयोगशाला में भेजा गया है।

वही इस पूरे मामले में सीओ/एएसपी सदर कैंट नवीना शुक्ला ने बताया कि यह मामला सदर तेली मोहल्ले का है। जहां पर एक युवती का शव मिला था। जिसके क्रम में पुलिस मौके पर गई थी। वहां पाया कि एक लाश डीकंपोस्ट अवस्था में पड़ी थी। उसके पिता के द्वारा बताया गया की 4 महीने पहले उसकी बीमारी से डेथ हो गई थी और वह निर्णय नहीं ले पाया कि उसका अंतिम संस्कार किस तरीके से किया जाए। वह चार-पांच दिन शव के साथ रहकर हरिद्वार चला गया था। 4 महीने बाद यह लौटा है और रिश्तेदारों को खबर मिली। रिश्तेदारों ने पड़कर इससे पूछताछ की और पुलिस को सूचना दी। तंत्र मंत्र का कोई मामला नहीं है ,लड़की बीमार रहती थी इसलिए वह डॉक्टर को दिखाने के अलावा झाड़ फूंक भी करते थे। क्योंकि पूरी बॉडी डीकंपोज हो गई थी ,पीएम रिपोर्ट में बहुत स्पष्ट कुछ नहीं आ पाया है। हालांकि उस पर किसी चोट आदि के निशान नहीं मिले हैं, ना ही कोई फैक्चर के निशान है। अन्य बिंदुओं पर लड़की के मोबाइल की cdr निकलवा कर हम जांच करने का प्रयास कर रहे हैं कि वास्तव में घटना के पीछे या शव चार महीने घर में पड़ा रहा है इसके पीछे क्या कारण है। लड़की के पिता ने बताया कि व की दुर्गंध दूर करने के लिए वह स्प्रे वगैरा करता था। जिससे बाहर कोई दुर्गंध ना जाए।

नेटवर्क 10 न्यूज़ ने इस घटना पर मनोचिकित्सक डॉ काशिका जैन ने बताया कि कई बार एकाएक हुए हादसे किसी भी इंसान पर इतना प्रभाव डालते हैं कि वो सही और गलत चीजों में फैसला नहीं कर पता है। जहां इस मामले में भी शिक्षा विभाग से रिटायर उदयभानु बिस्वास की पत्नी की साल 2013 में मौत हो गई थी और पत्नी की मौत से उन्हें इतना गहरा झटका लगा कि वो अपने आप को संभाल नहीं पाए और वो एकाएक ऐसी दशा में पहुंच गए थे जहां वो सही और गलत का फैसला भी नहीं कर पा रहे थे। इस दौरान डॉक्टर ने बताया कि ऐसे मामलों में पीड़ित व्यक्ति सही और गलत में फैसला नहीं कर पता है और वो अपने खुद के बनाए भ्रम को ही सही मानते हुए बार-बार उसी बात को दोहराता रहता है। उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि बेटी के शरीर के सड़ने पर उससे आने वाली दुर्गंध को दबाने के लिए जिस तरीके से पिता के द्वारा उसे पर इत्र डाला जा रहा था तो कहीं ना कहीं उनका दिमाग सही रूप से कम कर रहा था लेकिन वो सही और गलत में फैसला नहीं कर पा रहे थे जैसा कि इस मामले में भी देखने को मिला है और उसी की वजह थी कि महीनों तक अपनी बेटी के मृत शरीर के साथ रहने वाला पिता ही उसका अंतिम संस्कार ना करके जादू टोने के माध्यम में लग गया था।