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Uttarakhand: मंत्री जी अपना कार्यकाल पूरा क्यों नहीं कर पाए? 'अशुभ बंगलों' से जुड़ी चर्चा फिर हुई तेज

उत्तराखंड की राजनीति में सत्ता के गलियारों से लेकर आम जनता तक, सरकारी बंगलों को लेकर कई तरह की धारणाएं प्रचलित हैं। खासकर कुछ बंगलों को ‘अशुभ’ माना जाता है, जहां रहने वाले मंत्री या मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाते। हाल ही में वित्त मंत्री प्रेम चंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद एक बार फिर ये चर्चा तेज हो गई है।

देहरादून की यमुना कॉलोनी में स्थित सरकारी बंगला आर-2 को लेकर ये धारणा गहरी हो चुकी है कि इसमें रहने वाले मंत्री को अपना पद गंवाना पड़ता है। प्रेम चंद अग्रवाल से पहले, इस बंगले में रहने वाले एक और मंत्री भी अपने कार्यकाल को पूरा नहीं कर पाए।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री आवास को लेकर भी ऐसा ही अंधविश्वास लंबे वक्त से चला आ रहा है। ये धारणा बनी हुई है कि यहां रहने वाला मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाता है। राज्य के नेतृत्व में बदलाव के बारे में अटकलों का बाजार गर्म है। ऐसे में लोग इसे अशुभ बंगलों के अंधविश्वास से जोड़कर देख रहे हैं। 

हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस दावे को खारिज कर दिया कि अंधविश्वास की वजह से उन्होंने मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास में रहने से परहेज किया। पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। उनका कहना है कि हालांकि वे अंधविश्वास में विश्वास नहीं रखते, लेकिन वास्तु की इसमें भूमिका हो सकती है।

राजनेताओं की किस्मत सत्ता के तरीके और राजनैतिक दांव-पेंचों से अच्छी तरह जुड़ी हुई है। उन्हें अंधविश्वासों से जोड़ना तर्क को चुनौती देता है। हालांकि जब बात विश्वास की आती है तो तर्क कभी भी जीत नहीं पाता।