Uttarakhand: पिछले साल प्रकाशित स्टडी के मुताबिक नैनीताल झील की 16 जगहों पर सतही जल के सर्वेक्षण में खतरनाक मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी पाई गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे न सिर्फ झील के पारिस्थितिकी तंत्र पर बल्कि लोगों की सेहत पर भी खतरा मंडरा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक माइक्रोप्लास्टिक झील में मछलियों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं और वो मर रही हैं। नैनीताल नगर पालिका इस समस्या से वाकिफ है। अधिकारियों का कहना है कि उसने प्रदूषण पर नियंत्रण रखने के लिए टीमें तैनात कर दी हैं।
माइक्रोप्लास्टिक, प्लास्टिक के बेहद सूक्ष्म कणों होते हैं जो आसानी से पानी के साथ घुल जाते हैं। इन कणों का आकार एक से पांच मिलीमीटर तक होता है। जब मछलियां और दूसरे समुद्री जीव इन्हें खा लेते हैं, तो ये पाचन तंत्र को ब्लॉक कर सकते हैं, भूख कम कर सकते हैं और यहां तक कि मौत की वजह भी बन सकते हैं।
माइक्रोप्लास्टिक मनुष्यों के लिए भी गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करते हैं। ये फूड चेन में दाखिल हो सकते हैं। इनमें ऐसे केमिकल होते हैं जो हार्मोन को बाधित कर सकते हैं, सूजन को बढ़ा सकते हैं, या समय के साथ शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।