Uttarakhand: सर जिम कॉर्बेट के नाम से मशहूर एडवर्ड जेम्स कॉर्बेट की 150वीं जयंती पर उत्तराखंड के रामनगर में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वन अधिकारी, पर्यावरणविद, प्रकृति मार्गदर्शक और उत्तराखंड के अलग-अलग जगहों से आए लोगों ने वन्यजीव संरक्षण में उनकी भूमिका को याद किया।
जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान के अलावा उनके सम्मान में कई शहरों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। उनमें मुख्य रूप से कॉर्बेट के शिकारी से वन्यजीव संरक्षक बनने को प्रमुखता से दिखाया गया। जिम कॉर्बेट का जन्म 25 जुलाई, 1875 को नैनीताल में हुआ था। उन्हें न सिर्फ आदमखोर बाघों से आम लोगों को बचाने के लिए, बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित करने के लिए भी याद किया जाता है।
जिम कॉर्बेट ने आधुनिक उत्तराखंड में वन्यजीवों, खास कर बाघों और जंगलों के संरक्षण में अहम भूमिका निभाई थी। उनके सम्मान में भारत के सबसे पुराने राष्ट्रीय उद्यान, हैली राष्ट्रीय उद्यान का नाम 1957 में बदल कर जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान कर दिया गया।
आज की तारीख में ये उद्यान न सिर्फ बाघों के संरक्षण के लिए भारत की प्रतिबद्धता का प्रतीक है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जिम कॉर्बेट की 150वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम इस बात का सबूत हैं कि उनकी विरासत आज भी महफूज है। आम लोगों की रक्षा हो या वन्यजीवों की, उनका काम हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा।