प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाले केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को 2,642 करोड़ रुपये की लागत वाली वाराणसी-पंडित दीन दयाल उपाध्याय (डीडीयू) मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी। इस प्रोजेक्ट में गंगा नदी पर एक नया कॉरिडोर बनेगा, जिसमें गंगा नदी के ऊपर डबल डेकर पुल होगा। इसमें नीचे चार रेलवे लाइन होगी और ऊपर छह लेन का हाईवे होगा। ये कॉरिडोर वाराणसी और डीडीयू जंक्शन मार्ग के बीच तीसरी और चौथी रेलवे लाइन को जोड़ेगा।
सरकारी बयान में कहा गया है, "प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट ट्रांसपोर्ट-ट्रैफिक को आसान बनाएगी और भीड़भाड़ को कम करेगी। इससे भारतीय रेलवे के सबसे बिजी सेक्शन पर जरूरी बुनियादी ढांचागत विकास होगा। ये प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश के वाराणसी और चंदौली जिलों से होकर गुजरेगा।" इसमें कहा गया है, "वाराणसी रेलवे स्टेशन, भारतीय रेलवे का अहम केंद्र है, जो प्रमुख इलाकों को जोड़ता है और तीर्थयात्रियों, सैलानियों और जिले की आबादी के लिए एंट्री गेट का काम करता है।"
बयान के मुताबिक, वाराणसी-डीडीयू जंक्शन मार्ग, यात्री और माल यातायात दोनों के लिए अहम है। ये रूट कोयला, सीमेंट और फूड आइटम जैसी चीजों के ट्रांसपोर्ट के साथ-साथ बढ़ते सैलानी और इंडस्ट्रियल डिमांड को पूरा करता है, जिससे इस पर भारी भीड़ होती है।
बयान में कहा गया, "इस मुद्दे को हल करने के लिए, बुनियादी ढांचे के विकास की जरूरत है, जिसमें गंगा नदी पर एक नया रेल-कम-रोड पुल और तीसरी और चौथी रेलवे लाइनों को जोड़ना शामिल है। इसका मकसद क्षमता और दक्षता में सुधार करना और इलाके के सामाजिक-आर्थिक विकास को सपोर्ट करना है।" इसमें कहा गया है, "इस सेक्शन पर भीड़भाड़ से राहत के अलावा, प्रस्तावित सेक्शन पर 27.83 एमटीपीए (मिलियन टन प्रति वर्ष) माल ढुलाई का अनुमान है।"
रोजगार/स्वरोजगार के मौके बढ़ने का जिक्र करने वाली आधिकारिक रिलीज में कहा गया है कि ये प्रोजेक्ट मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के लिए पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का नतीजा है, जो एकीकृत योजना के माध्यम से संभव हुआ है और लोगों, चीजों और सेवाओं की आवाजाही के लिए बेहतरीन कनेक्टिविटी मुहैया कराएगा। सरकार के मुताबिक उत्तर प्रदेश के दो जिलों को कवर करने वाला ये प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क को लगभग 30 किलोमीटर तक बढ़ाएगा।