उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में स्थित सौज झील को रामसर साइट घोषित किया गया है। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश में रामसर साइट्स की संख्या बढ़कर 14 हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे प्रदेश के लिए गौरव का क्षण बताते हुए प्रदेशवासियों को बधाई दी। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी इस उपलब्धि पर उत्तर प्रदेश को शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की समृद्ध प्राकृतिक विरासत को संरक्षित करने के प्रयासों को नई गति मिल रही है। सौज झील को मिली यह मान्यता प्रदेश की प्राकृतिक संपदा को दर्शाती है। साथ ही, यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के संकल्प को भी मजबूत करती है।
प्रवासी पक्षियों और जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र है सौज झील
मैनपुरी जिले की किशनी तहसील में स्थित सौज झील एक महत्वपूर्ण मौसमी आर्द्रभूमि है। प्रभागीय वनाधिकारी शिवम मिश्र के अनुसार, यह क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध है और प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण आश्रयस्थल है। झील के आसपास कृषि क्षेत्र भी मौजूद हैं।
यहां पक्षियों की 96 प्रजातियां, मछलियों की 19 प्रजातियां और सरीसृपों की 7 प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें कई प्रजातियां संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। झील में संकटग्रस्त सारस और निकट संकटग्रस्त ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क जैसे पक्षी भी पाए जाते हैं। अपनी समृद्ध पक्षी विविधता और पारिस्थितिक महत्व के कारण सौज झील आर्द्रभूमि संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाती है।
यूपी में 14 रामसर साइट्स, देश में दूसरे स्थान पर प्रदेश
सौज झील को रामसर साइट का दर्जा मिलने के बाद उत्तर प्रदेश में ऐसी साइट्स की संख्या 14 हो गई है। प्रदेश देश में रामसर साइट्स की संख्या के मामले में दूसरे स्थान पर है। उत्तर प्रदेश की 14 रामसर साइट्स में नवाबगंज पक्षी अभयारण्य (उन्नाव), पार्वती अरगा पक्षी अभयारण्य (गोंडा), समान पक्षी अभयारण्य (मैनपुरी), समसपुर पक्षी अभयारण्य (रायबरेली), सरसई नावर झील (इटावा), सांडी पक्षी अभयारण्य (हरदोई), सूर सरोवर पक्षी विहार (आगरा), बखिरा पक्षी अभयारण्य (संत कबीर नगर), ऊपरी गंगा नदी का ब्रजघाट से नरोरा तक का क्षेत्र, हैदरपुर वेटलैंड (मुजफ्फरनगर-बिजनौर), पटना पक्षी अभयारण्य (एटा), शेखा झील पक्षी अभयारण्य (अलीगढ़), जयप्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य यानी सुरहा ताल (बलिया) और सौज झील (मैनपुरी) शामिल हैं। रामसर मान्यता से सौज झील की अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत होगी और इसके संरक्षण तथा जैव विविधता को सुरक्षित रखने के प्रयासों को बढ़ावा मिलेगा।