Abu Dhabi: संयुक्त अरब अमीरात ने मंगलवार को घोषणा की कि वह एक मई से तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक और इसके व्यापक समूह 'ओपेक प्लस' को छोड़ देगा। इससे तेल कार्टेल अपने सबसे बड़े उत्पादकों में से एक को खो देगा। इस कदम से वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर ओपेक का असर कमजोर पड़ सकता है।
यह फैसला ओपेक के उत्पादन प्रतिबंधों को लेकर यूएई की बेचैनी का नतीजा है। उसे लगा कि ये प्रतिबंध बहुत ज्यादा सख्त हैं,जिसका मतलब था कि वो अपनी मर्जी के मुताबिक तेल नहीं बेच पा रहा था। इसके अलावा, इस क्षेत्र में राजनीतिक और आर्थिक मामलों को लेकर यूएई के संबंध ओपेक के सबसे बड़े तेल उत्पादक देश सऊदी अरब के साथ लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। ईरान युद्ध के दौरान इन मतभेदों में और भी ज्यादा तनाव आ गया।
ओपेक से यूएई के अलग होने का बाज़ारों पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि ईरान में युद्ध के कारण पूरी दुनिया में तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जो एक ऐसा जलमार्ग है जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का पांचवां हिस्सा - जिसमें यूएई का अधिकांश हिस्सा भी शामिल है - परिवहन होता है।
हाल के वर्षों में कच्चे तेल के अमेरिकी उत्पादन में वृद्धि के कारण ओपेक की बाजार शक्ति पहले से ही कमजोर हो रही थी। युद्ध से पहले सऊदी अरब प्रतिदिन एक करोड़ बैरल से अधिक तेल का उत्पादन कर रहा था। वहीं, अमेरिका प्रतिदिन एक करोड़ से अधिक बैरल तेल का उत्पादन करता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने दो कार्यकाल के दौरान इस कार्टेल के लगातार आलोचक रहे हैं।