ओडिशा के पवित्र शहर पुरी में आज विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा का शुभारंभ हो गया है। इस पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपने भव्य रथों पर सवार होकर जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक नौ दिनों की यात्रा पर निकलेंगे। हर साल की तरह इस बार भी देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु रथ यात्रा में शामिल होने के लिए पुरी पहुंचे हैं। भक्त भगवान के तीनों रथों—नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन—को लगभग 3 किलोमीटर तक खींचकर गुंडिचा मंदिर तक ले जाएंगे।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुंडिचा मंदिर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन चक्र का जन्मस्थान माना जाता है। भगवान यहां नौ दिन तक विराजमान रहते हैं। रथ यात्रा को सुरक्षित और शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए राज्य सरकार और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) ने व्यापक तैयारियां की हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार, रथ यात्रा से पहले होने वाले सभी प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान तय समय पर पूरे कर लिए गए हैं।
रथ यात्रा का कार्यक्रम
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16 जुलाई: भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का शुभारंभ और गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान।
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24 जुलाई: बाहुदा यात्रा, यानी भगवान की मुख्य मंदिर में वापसी।
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25 जुलाई: सुना बेशा (स्वर्ण श्रृंगार), जिसमें तीनों देवताओं को सोने के भव्य आभूषणों से सजाया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रथ यात्रा के अवसर पर सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि जगन्नाथ रथ यात्रा भारत की प्राचीन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यह परंपरा लोगों को विनम्रता, एकता और निस्वार्थ सेवा का संदेश देती है। प्रधानमंत्री ने भगवान जगन्नाथ से सभी के अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और देश में भाईचारे की भावना बनाए रखने की प्रार्थना की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी रथ यात्रा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व भक्त और भगवान के मिलन का अद्भुत अवसर है। उन्होंने कामना की कि महाप्रभु जगन्नाथ की कृपा से देश और सभी देशवासियों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे।