नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय प्रशासन ने खतरे वाले इलाकों को खाली कराने का आदेश दिया है। नेपाल के पूर्व वित्त और ऊर्जा मंत्री बरशमान पुन ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की है। बरशमान पुन ने बताया कि एक बार फिर बाढ़ आने का खतरा है, जिसके चलते पूरे इलाके को खाली कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सावधान रहने की चेतावनी दी है। बाढ़ के कारण आगे जाने वाली सड़क भी बंद हो गई है। उन्होंने बताया कि इलाके में सड़क निर्माण का काम चल रहा था, लेकिन हालात बिगड़ने के बाद इसे रोक दिया गया है। अब सड़क को दोबारा बनाने का काम किया जा रहा है।
बरशमान पुन ने बताया कि करीब 500 से 600 लोग अब भी लापता हैं। उन्होंने इस घटना को बेहद चौंकाने वाला और गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि राहत और बचाव कार्य के लिए प्रशासन के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। बाढ़ और आपदा के बीच नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह और उनकी कैबिनेट के मंत्रियों ने मदद के लिए बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री और सभी मंत्रियों की एक महीने की सैलरी प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में जमा की जाएगी।
कैबिनेट ने वित्त मंत्रालय को राहत और पुनर्वास के लिए विशेष पैकेज तैयार करने का निर्देश भी दिया है। lइसके अलावा, कैबिनेट ने भारत से 25 हजार मीट्रिक टन DAP खाद खरीदने को भी मंजूरी दी है। यह खाद भारत से सरकारी स्तर पर खरीद प्रक्रिया के जरिए मंगाई जाएगी। नेपाल में मौजूदा संकट की शुरुआत 26 अगस्त को तिब्बत-नेपाल सीमा के पास आई विनाशकारी बाढ़ से हुई थी। तेज बाढ़ के पानी के साथ बड़ी मात्रा में मिट्टी और पत्थर बहकर आए, जिससे भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में भारी नुकसान हुआ।
शुक्रवार को छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास बनी एक झील की प्राकृतिक बांध जैसी रुकावट टूट गई। इसके बाद इलाके में फिर से बाढ़ का पानी बढ़ गया। चीन के सिचुआन इलाके में 5.1 तीव्रता का भूकंप आने के बाद त्रिशूली नदी का जलस्तर बढ़ने का खतरा पैदा हो गया। इसके चलते त्रिशूली इलाके के लोगों को एक बार फिर सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। राहत और बचाव दल अब तक 475 शव बरामद कर चुके हैं। प्रशासन की ओर से बचाव और राहत अभियान लगातार जारी है।