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उदयनिधि के सनातन वाले बयान पर सियासत, तमिलनाडु मंत्री अर्जुन बोले- 'हम हिंदुओं के नहीं, हिंदुत्व के खिलाफ हैं'

तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए गए बयान से एक बार फिर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। 14 मई 2026 को विधानसभा में बोलते हुए उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि “सनातन, जो लोगों को बांटता है, उसे खत्म कर देना चाहिए।” उदयनिधि के इस बयान पर तमिल अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के महासचिव और तमिलनाडु सरकार में मंत्री आधव अर्जुन ने अलग रुख अपनाया है। चेन्नई में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी जाति व्यवस्था और असमानता के खिलाफ है, लेकिन सभी धर्मों का समान सम्मान करती है।

आधव अर्जुन ने स्पष्ट किया कि वे हिंदू धर्म के विरोधी नहीं हैं। उनका कहना था कि उनका विरोध ‘हिंदुत्व’ की उस सोच से है, जिसमें एक धर्म को दूसरों पर थोपने की कोशिश की जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि वे सनातन धर्म का वास्तविक अर्थ पूरी तरह नहीं समझते। आधव अर्जुन ने उदयनिधि स्टालिन से उनके बयान पर स्पष्टीकरण भी मांगा है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक पद पर बैठे नेताओं को सोच-समझकर बयान देना चाहिए और ऐसी भाषा से बचना चाहिए जिससे किसी समुदाय की भावनाएं आहत हों।

विवाद बढ़ने के बाद उदयनिधि स्टालिन ने सफाई देते हुए कहा कि उनका बयान किसी धर्म के खिलाफ नहीं था। उन्होंने कहा कि उनका निशाना केवल वह सामाजिक व्यवस्था है, जो लोगों को जाति के आधार पर बांटती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे मंदिर जाने या धार्मिक आस्था के विरोधी नहीं हैं।भारतीय जनता पार्टी ने इस बयान की कड़ी आलोचना की है। तमिलनाडु भाजपा के नेताओं ने आरोप लगाया कि डीएमके और अन्य दल राजनीतिक लाभ के लिए हिंदू आस्था को निशाना बना रहे हैं। यह विवाद तमिलनाडु की राजनीति में डीएमके और टीवीके के बीच वैचारिक अंतर को भी सामने लाता है। जहां डीएमके सामाजिक न्याय और द्रविड़ विचारधारा पर जोर देती है, वहीं टीवीके सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान की बात कर रही है।