दिल्ली सरकार ने सरकारी विभागों के डेटा को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल के लिए तैयार करने की दिशा में नई पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री और योजना मंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में मंगलवार को ‘हार्मोनाइजेशन एंड इंटरलिंकिंग ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव डेटा फॉर AI-रेडी गवर्नेंस’ विषय पर एक उच्चस्तरीय वर्कशॉप आयोजित की गई।
वर्कशॉप में दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों के प्रशासनिक सचिव, विभागाध्यक्ष और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान सरकारी डेटा के बेहतर इस्तेमाल, AI की मदद से फैसले लेने और नागरिकों को उनकी जरूरत के अनुसार समय पर सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने पर चर्चा हुई। इस मौके पर दिल्ली सरकार के योजना विभाग और एकस्टेप फाउंडेशन के बीच MOU पर हस्ताक्षर किए गए। एकस्टेप फाउंडेशन दिल्ली सरकार के नॉलेज पार्टनर के रूप में काम करेगा और सरकारी डेटा को AI के इस्तेमाल के लिए तैयार करने में सहयोग देगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि डेटा AI का ईंधन है और इसका इस्तेमाल नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए होना चाहिए। उन्होंने कहा कि AI का फायदा उन लोगों तक पहुंचना चाहिए, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। वर्कशॉप के दौरान एकस्टेप फाउंडेशन ने ‘डेटा धारा फॉर एन AI-रेडी दिल्ली’ पर प्रस्तुति दी। इस दौरान ‘डेटा धारा’ पेपर भी लॉन्च किया गया। ‘डेटा धारा’ यानी Data Harnessed for AI-Ready Advancements (DHARA) एक ओपन-सोर्स और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित व्यवस्था है। इसका उद्देश्य सरकारी विभागों और संस्थानों के डेटा को AI के इस्तेमाल के लिए तैयार करना है। इसे ऐसी व्यवस्था के रूप में तैयार किया गया है, जिसे अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से इस्तेमाल किया जा सके और विभिन्न सरकारी सिस्टम आपस में आसानी से जुड़ सकें।
वर्कशॉप में डेटा के इस्तेमाल से सरकारी योजनाओं और सेवाओं को बेहतर बनाने के कई उदाहरणों पर चर्चा हुई। इनमें नागरिकों के जन्म और मृत्यु से जुड़े डेटा को PMJJBY और PMSBY जैसी योजनाओं से जोड़ना, लोगों को उनकी भाषा में सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए Voice AI का इस्तेमाल और निवेशकों को सरकारी सुविधाओं और इंसेंटिव की जानकारी आसानी से उपलब्ध कराना शामिल है। इसके अलावा मातृ वंदना योजना और दिल्ली लखपति बिटिया योजना के लाभार्थियों की पहचान करने, पात्र लोगों को योजनाओं से जोड़ने और नामांकन से छूट जाने वाले लोगों की संख्या कम करने पर भी चर्चा हुई। कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को अलग-अलग सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए डेटा के इस्तेमाल पर भी उदाहरण साझा किए गए।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि अलग-अलग सरकारी विभागों के पास अलग-अलग डेटा और रिकॉर्ड हैं, लेकिन आम नागरिक के लिए सरकार एक ही है। इसलिए जहां कानून इसकी अनुमति देता है और तकनीकी रूप से संभव है, वहां विभागों के बीच डेटा का सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल होना चाहिए।उन्होंने कहा कि इससे लोगों को एक ही जानकारी बार-बार अलग-अलग विभागों में देने की जरूरत कम होगी। साथ ही सही व्यक्ति तक सही योजना और सेवा पहुंचाने में भी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य होना चाहिए कि “सही लाभ, सही व्यक्ति और सही समय पर पहुंचे।”
रेखा गुप्ता ने कहा कि केवल अलग-अलग डेटाबेस को आपस में जोड़ देना ही पर्याप्त नहीं है। डेटा की एक जैसी परिभाषा, समान मानक, बेहतर गुणवत्ता और अलग-अलग सिस्टम के बीच आसानी से डेटा साझा करने की व्यवस्था भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि डेटा की सफलता इस बात से नहीं मापी जानी चाहिए कि कितने डेटाबेस आपस में जुड़े हैं, बल्कि इस बात से मापी जानी चाहिए कि इससे आम लोगों की जिंदगी कितनी आसान हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि AI की मदद से सरकारी डेटा का बेहतर विश्लेषण किया जा सकता है। इससे भविष्य की जरूरतों का अनुमान लगाने, डेटा में गड़बड़ियों की पहचान करने, शिकायतों का बेहतर समाधान करने और अलग-अलग भाषाओं में नागरिकों से संवाद करने में मदद मिलेगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर डेटा अलग-अलग जगहों पर बंटा हुआ, पुराना या एक-दूसरे से मेल नहीं खाता है, तो AI का पूरा फायदा नहीं उठाया जा सकता। इसलिए दिल्ली सरकार का लक्ष्य भरोसेमंद और अच्छी गुणवत्ता वाला डेटा सिस्टम तैयार करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी कामकाज में डेटा का इस्तेमाल बढ़ने के साथ उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बढ़ती है। लोगों को भरोसा होना चाहिए कि सरकार को दी गई उनकी निजी जानकारी सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि डेटा का इस्तेमाल तय उद्देश्य के लिए ही होना चाहिए। साथ ही यह भी तय किया जाना जरूरी है कि किस अधिकारी या विभाग को किस डेटा तक पहुंच मिलेगी। डेटा की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ सभी जरूरी कानूनों और नीतियों का पालन करना होगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार ऐसी व्यवस्था बनाना चाहती है, जिसमें सभी सरकारी विभाग आपस में बेहतर तालमेल के साथ काम करें और फैसले ठोस डेटा के आधार पर लिए जाएं। इससे नागरिकों को अलग-अलग सरकारी सेवाओं के लिए बार-बार एक ही जानकारी देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही अधिकारियों का समय भी बचेगा और वे कागजी काम के बजाय समस्याओं के समाधान पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना विभाग और एकस्टेप फाउंडेशन के बीच हुआ MOU और मंगलवार की वर्कशॉप इस दिशा में एक शुरुआत है। अब सरकार का फोकस ऐसी योजनाओं को लागू करने पर होगा, जिनका सीधा फायदा आम लोगों को मिले और जिनके परिणामों को साफ तौर पर मापा जा सके।