उत्तराखंड के वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत से जुड़े करीब दो दशक पुराने विवाद ने एक बार फिर चर्चा शुरू कर दी है। असम की रहने वाली इंदिरा देवी उर्फ जेनी ने दोबारा DNA टेस्ट कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे उनके बेटे के पिता की पहचान स्पष्ट हो सकेगी और उसे कानूनी अधिकार मिल सकेंगे।
जेनी ने आरोप लगाया कि साल 2002 में जब वह 16 साल की थीं, तब कांग्रेस नेता के एक कार्यकर्ता ने उन्हें देहरादून की यमुना कॉलोनी स्थित हरक सिंह रावत के आवास पर पहुंचाया था। उनका दावा है कि वह करीब डेढ़ से दो महीने तक वहां रही थीं।
जेनी ने लगाए गंभीर आरोप
जेनी के मुताबिक, उस समय वह यमुना कॉलोनी में एक STD बूथ पर काम करती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी का एक कार्यकर्ता उन्हें वहां से हरक सिंह रावत के घर ले गया था। जेनी का दावा है कि बाद में वह गर्भवती हो गईं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हॉस्टल में रखने के नाम पर उन्हें नारी निकेतन में ऐसी महिलाओं के बीच रखा गया, जिन्हें मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं थीं। जेनी ने कहा कि इस मामले की जांच कराई जा सकती है।
बेटे को पिता का नाम और कानूनी अधिकार दिलाने की मांग
जेनी ने कहा कि उनकी मुख्य मांग है कि उनके साथ हुए कथित यौन अपराध के मामले में दोषी को सजा मिले। इसके साथ ही उनके बेटे को उसके पिता का नाम और उससे जुड़े कानूनी अधिकार दिए जाएं। उन्होंने दोबारा DNA जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि वह अपने बेटे को उसका अधिकार दिलाना चाहती हैं।
2003 में सामने आया था मामला
'जेनी प्रकरण' उत्तराखंड की राजनीति से जुड़ा करीब दो दशक पुराना विवाद है। यह मामला पहली बार 2003 में सामने आया था। जून 2003 में जेनी ने देहरादून के एक सरकारी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था और दावा किया था कि हरक सिंह रावत उसके पिता हैं।
उस समय उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। सीबीआई की ओर से कराए गए DNA टेस्ट में बच्चे का DNA हरक सिंह रावत से मेल नहीं खाया था। इसके बाद उन्हें इस मामले में क्लीन चिट मिल गई थी। हरक सिंह रावत तत्कालीन एनडी तिवारी सरकार में राजस्व मंत्री रह चुके हैं। फिलहाल वह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और पार्टी के चुनाव प्रचार में सक्रिय हैं।