कुमाऊं में भाद्रपद की पहली तिथि को घी त्यार यानी सिंह संक्रांति का पर्व मनाने की परंपरा है। इस वर्ष यह लोकपर्व आज सोमवार को मनाया जा रहा है। कुमाऊं की लोक संस्कृति और कृषि परंपराओं से जुड़े इस पर्व पर घी का सेवन करना विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन घी खाने से शरीर स्वस्थ रहता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
घी त्यार के अवसर पर कुमाऊं के घरों में पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं। इनमें उड़द की दाल से तैयार बेडू रोटी, पूड़ी, पुए और खीर प्रमुख हैं। इसके अलावा पिनालू के पत्तों से गाबे की सब्जी बनाने की शुरुआत भी इसी दिन से की जाती है। पर्व के दौरान परिवार के बड़े-बुजुर्ग बच्चों के सिर पर घी या मक्खन लगाकर उन्हें स्वस्थ और दीर्घायु होने का आशीर्वाद देते हैं।
घी त्यार को कई स्थानों पर ओल्गिया पर्व के नाम से भी जाना जाता है। गांवों में इस मौके पर झोड़ा-चांचरी जैसे पारंपरिक लोकगीत और नृत्य आयोजित किए जाते हैं। यह पर्व केवल खान-पान तक सीमित नहीं है, बल्कि कुमाऊं की कृषि संस्कृति और सामाजिक परंपराओं से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
किसान इस दिन अपनी फसलों के पहले फल, दूध-दही और अन्य कृषि उत्पाद देवी-देवताओं, पंडितों और रिश्तेदारों को भेंट करते हैं। इस परंपरा के जरिए प्रकृति, ईश्वर और कृषि के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। सिंह संक्रांति के अवसर पर सूर्य पूजा, घी का सेवन और दान-पुण्य करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन सूर्य की पूजा और घी का दान करने से सूर्य ग्रह मजबूत होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।