गुजरात सरकार ने सरकारी स्कूलों में छात्राओं की उपस्थिति बढ़ाने और मासिक धर्म से जुड़ी स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए नई पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, शिक्षा मंत्री प्रद्युम्न वाजा और राज्य शिक्षा मंत्री रिवाबा जडेजा के नेतृत्व में शुरू की गई इस योजना के तहत कक्षा 6 से 12 तक पढ़ने वाली 10 लाख से ज्यादा छात्राओं को हर महीने मुफ्त सैनिटरी पैड दिए जाएंगे। इस योजना पर सरकार करीब 46.68 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
इस पहल के तहत प्रत्येक छात्रा के लिए हर साल 360 रुपये की राशि निर्धारित की गई है। छात्राओं को हर महीने अच्छी गुणवत्ता वाले ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी पैड स्कूल में ही मुफ्त दिए जाएंगे। शिक्षा विभाग ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि छात्राओं को बिना किसी झिझक और शर्मिंदगी के सहज माहौल में सैनिटरी पैड उपलब्ध कराए जाएं।
हर स्कूल में एक महिला शिक्षक को ‘नोडल टीचर’ की जिम्मेदारी दी जाएगी। नोडल टीचर छात्राओं को सैनिटरी पैड बांटने के साथ मासिक धर्म और व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़ी सही जानकारी भी देंगी। छात्राएं अपनी परेशानियों और सवालों पर उनसे खुलकर बात कर सकेंगी। इसका उद्देश्य मासिक धर्म को लेकर लड़कियों के मन में मौजूद डर और गलत धारणाओं को दूर करना और उनमें आत्मविश्वास बढ़ाना है।
सरकार ने सैनिटरी पैड के इस्तेमाल के बाद उनके सही तरीके से निपटारे पर भी जोर दिया है। स्कूलों को ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2016 के अनुसार इस्तेमाल किए गए पैड का निपटारा करना होगा। इस्तेमाल किए गए पैड को कागज में लपेटकर गीले और सूखे कचरे से अलग रखना होगा। इन्हें खुले में या शौचालय में फेंकने के बजाय स्थानीय कचरा संग्रह व्यवस्था को सौंपना होगा।
गुजरात सरकार ने स्कूलों में मौजूद सैनिटरी पैड डिस्पोजल मशीन यानी इन्सिनरेटर को चालू हालत में रखने और समय-समय पर उनकी सर्विसिंग कराने के निर्देश भी दिए हैं। इससे स्कूलों में सैनिटरी पैड के सुरक्षित और साफ तरीके से निपटारे में मदद मिलेगी। सरकार का कहना है कि यह योजना केवल स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी पहल नहीं है, बल्कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में मासिक धर्म के दौरान स्कूल नहीं जा पाने वाली छात्राओं को इससे फायदा मिलेगा और उनकी स्कूल में नियमित उपस्थिति बढ़ाने में मदद मिलेगी।
मुफ्त सैनिटरी पैड मिलने से छात्राओं को अस्वच्छ कपड़े इस्तेमाल करने से होने वाले संक्रमण और प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों से भी बचाया जा सकेगा। वहीं, ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल पैड पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प होंगे। सरकार की इस पहल से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर सैनिटरी पैड खरीदने का आर्थिक बोझ भी कम होगा।