उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने से खेती की बड़ी जमीन पानी में डूब गई है। साथ ही, जबरदस्त कटाव की वजह से नदी के किनारे बसे गांवों के लोगों में चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि ऐसा हर साल होता है और हर मानसून सीजन में दो-तीन महीने तक उन्हें रोजाना आने-जाने के लिए नावों पर निर्भर रहना पड़ता है। हर साल की तरह, इस बार भी जिला प्रशासन ने बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए अपनी तैयारियों को और मजबूत किया है।
बाढ़ से निपटने के लिए 28 चौकियां सक्रिय कर दी गई हैं और संवेदनशील इलाकों में मोटरबोट तैनात की गई हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि इलाके में अभी गंभीर बाढ़ का कोई तत्काल खतरा नहीं है, फिर भी वे जलस्तर और बढ़ने पर हालात से निपटने के लिए तैयार हैं। जिला प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों को बेहतर बनाने के लिए 'हनुमान रथ' वाहन तैनात किया है। यह वाहन पानी और जमीन दोनों जगह चल सकता है। इसे सीएसआर यानी कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व पहल के जरिए हासिल किया गया है और बाढ़ या जलभराव वाले प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने और लोगों को बचाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
हालात से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने कदम उठाए हैं। हालांकि प्रभावित इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों का कहना है कि वे हर मानसून सीजन में किए जाने वाले अस्थायी उपायों के बजाय स्थायी समाधान चाहते हैं। इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 13 अगस्त से उत्तर प्रदेश में मानसून की गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है। 18 अगस्त तक राज्य में व्यापक बारिश के साथ-साथ कहीं-कहीं भारी बारिश होने का अनुमान है।