Breaking News

देहरादून में फर्जी डेमोग्राफिक चेंज के मुद्दे पर हिंदू परिवारों ने DM को लिखा पत्र     |   PM मोदी के बुलावे पर ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा का भारत दौरा तय, 18 से 22 फरवरी तक कार्यक्रम     |   विकसित भारत का संकल्प लेकर हम 'सेवा तीर्थ' में प्रवेश कर रहे: पीएम मोदी     |   गुजरात की गिफ्ट सिटी को नया नेतृत्व, उदय कोटक बने चेयरमैन     |   अमेरिका की साउथ कैरोलिना यूनिवर्सिटी में गोलीबारी, 2 लोगों की मौत     |  

उत्तराखंड: हिमस्खलन में बचाए गए कर्मचारियों ने आपदा के बारे में बताया

उत्तराखंड में चमोली जिले के माणा गांव में हिमस्खलन प्रभावित सीमा सड़क संगठन शिविर में 50 से ज्यादा मजदूर थे। शुक्रवार सुबह भी उन्होंने आम दिनों की तरह अपनी दिनचर्या शुरू की। इसके बाद जो हुआ उसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। तेज रफ्तार से बर्फ की चट्टान उस शेड की ओर बढ़ रही थी, जिसके नीचे मजदूरों का बसेरा था। हिमस्खन में जिंदा बचे लोगों का जोशीमठ के सैनिक अस्पताल में इलाज चल रहा है। उनमें से कुछ ने आपदा के पलों के बारे में बताया।

सभी मजदूर सीमा सड़ संगठन की परियोजना पर काम कर रहे थे। वे शिविर में शेड और कंटेनरों में रहते थे। हिमाचल प्रदेश के विपिन कुमार ने कहा कि कुछ लोग खुद को बचाने में कामयाब रहे। वे सेना के नजदीकी गेस्ट हाउस में चले गए। अधिकारियों ने बताया कि बर्फ के ढेर से निकाल कर जोशीमठ सैनिक अस्पताल लाए गए ज्यादातर मजदूरों की पीठ, सिर, हाथ और पैर में चोटें आईं।

गंभीर रूप से घायल दो लोगों को इलाज के लिए हवाई मार्ग से ऋषिकेश के एम्स में भेजा गया है। सीमा सड़क संगठन परियोजना पर काम करने वाले ज्यादातर मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के रहने वाले थे।