Chennai: मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु की पांच विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की अधिसूचना जारी करने पर लगी अंतरिम रोक को 8 सितंबर तक बढ़ा दिया है। चुनाव आयोग (ECI) ने अदालत को बताया कि इन सीटों से जुड़ी लंबित चुनाव याचिकाओं का फैसला होने तक उपचुनाव की घोषणा नहीं की जाएगी। इन पांच सीटों में त्रिची ईस्ट, विरालीमलाई, पेरुंदुरई, अंबासमुद्रम और करूर शामिल हैं। इन सीटों पर 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों को चुनौती देने वाली चुनाव याचिकाएं मद्रास हाईकोर्ट में लंबित हैं।
इनमें त्रिची ईस्ट सीट खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 2026 का विधानसभा चुनाव इसी सीट से जीता था। विजय ने 2026 के चुनाव में पेरंबूर और त्रिची ईस्ट, दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी। बाद में उन्होंने पेरंबूर सीट बरकरार रखते हुए त्रिची ईस्ट सीट खाली कर दी।मद्रास हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने कहा कि लंबित चुनाव मामलों का निपटारा होने तक इन सीटों पर उपचुनाव की अधिसूचना जारी करने की उसकी कोई योजना नहीं है।
हालांकि, तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार की ओर से इस दलील का विरोध किया गया। सरकार ने मामले की जल्द सुनवाई की मांग की और अंतरिम रोक हटाने का अनुरोध किया। अदालत ने रोक हटाने की मांग खारिज कर दी और अंतरिम आदेश को 8 सितंबर तक बढ़ा दिया। यह घटनाक्रम 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर जारी कानूनी चुनौतियों के बीच सामने आया है।
इससे पहले सोमवार को DMK अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मद्रास हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल कर कोलाथुर विधानसभा सीट से TVK उम्मीदवार वीएस बाबू की जीत को चुनौती दी। स्टालिन ने अपनी याचिका में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) में गड़बड़ी और VVPAT मशीनों से जुड़ी अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उन्होंने वोटों की दोबारा गिनती कराने और बाबू के चुनाव को रद्द कर उन्हें विजेता घोषित करने की मांग की है।
कोलाथुर से तीन बार विधायक रहे स्टालिन 2026 के विधानसभा चुनाव में बाबू से 8,795 वोटों के अंतर से हार गए। इस हार के साथ लगातार चौथी बार सीट बरकरार रखने की उनकी कोशिश भी खत्म हो गई। जीत के बाद वीएस बाबू ने अपनी सफलता का श्रेय TVK प्रमुख विजय और क्षेत्र में उनके जुड़ाव को दिया था। उन्होंने कहा था कि तमिलनाडु के मतदाता बदलाव चाहते थे और उन्होंने बदलाव कर दिया। बाबू ने यह भी कहा था कि कोलाथुर में जन्म लेने और पले-बढ़ने के कारण उन्हें क्षेत्र और वहां के मतदाताओं को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिली।