Breaking News

भारत-पाक वर्ल्ड कप मैच पर नया मोड़, पहले हटने की बात करने वाला PCB अब ICC से बातचीत को आगे आया     |   पीयूष गोयल बोले - भविष्य को देखते हुए अमेरिका के साथ ट्रेड डील हुई     |   मुंबई: RSS के इवेंट में एक्टर सलमान खान हुए शामिल     |   दक्षिण चीन सागर में चीन की ताकत का प्रदर्शन, विवादित इलाके में नौसेना और वायुसेना की संयुक्त गश्त     |   'भारत-मलेशिया के रिश्तों में काफी मजबूती है', कुआलालंपुर में बोले पीएम मोदी     |  

पत्नी और बेटी को हर महीने चार लाख रुपये का गुजारा भत्ता देंगे शमी, कलकत्ता हाई कोर्ट ने दिया आदेश

West Bengal: कलकत्ता हाई कोर्ट ने भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी को उनकी पत्नी हसीन जहां और बेटी के लिए हर महीने कुल चार लाख रुपये गुज़ारा भत्ता देने का निर्देश दिया है। हसीन जहां ने पहले जिला सत्र न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें शमी को पत्नी को ₹50,000 और बेटी को ₹80,000 हर महीने देने को कहा गया था। अब हाईकोर्ट ने इस रकम को बढ़ा कर कुल चार लाख प्रति माह कर दिया है।

हाईकोर्ट के जज अजय कुमार मुखर्जी ने आदेश में कहा, "मेरे विचार में ₹1,50,000 प्रति माह पत्नी के लिए और ₹2,50,000 बेटी के लिए उचित और न्यायसंगत राशि है, जिससे दोनों को वित्तीय स्थिरता मिल सके जब तक मुख्य याचिका का निपटारा नहीं हो जाता।" न्यायालय ने ये भी कहा कि बेटी के शिक्षा या अन्य जरूरतों के लिए शमी अतिरिक्त खर्च देने के लिए स्वतंत्र हैं।

हसीन जहां ने मार्च 2018 में जादवपुर पुलिस स्टेशन में मोहम्मद शमी और उनके परिवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। उन्होंने शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना, दहेज उत्पीड़न और मैच फिक्सिंग के आरोप लगाए थे। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि शमी ने उनकी और बेटी की जिम्मेदारियां उठाना बंद कर दिया है।

हसीन ने अदालत से सात लाख प्रति माह खुद के लिए और तीन लाख बेटी के लिए अंतरिम राहत के रूप में मांगा था। हालांकि, निचली अदालत ने यह याचिका खारिज कर दी थी और केवल ₹80,000 बेटी के लिए देने का आदेश दिया था। बाद में इस आदेश को संशोधित कर ₹50,000 पत्नी को और ₹80,000 बेटी को देने का निर्देश दिया गया।

अब हाईकोर्ट ने इस आदेश में बदलाव करते हुए कहा कि शमी की आय और वित्तीय स्थिति को देखते हुए वह अधिक राशि देने में सक्षम हैं। पत्नी और बेटी को वह जीवन स्तर मिलना चाहिए जो शादी के दौरान मिला करता था। ये मामला अभी अदालत में विचाराधीन है और यह राहत अंतरिम (अस्थायी) तौर पर दी गई है।