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लाओस में हाथियों के संरक्षण के लिए भारत की Vantara और Mandalao ने मिलाया हाथ, शुरू होगी नई पहल

भारत की वन्यजीव संरक्षण संस्था Vantara और Mandalao Elephant Conservation ने लाओस में हाथियों के कल्याण, पशु चिकित्सा सेवाओं और संरक्षण को मजबूत करने के लिए एक नई पहल शुरू की है। दोनों संस्थाओं के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत हाथियों के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधा, रिटायरमेंट और आजीवन देखभाल के साथ जंगली हाथियों की घटती आबादी को बचाने के प्रयास किए जाएंगे।

ऐतिहासिक रूप से लाओस को ‘लाखों हाथियों की धरती’ के नाम से जाना जाता था। लेकिन अब वहां करीब 400 जंगली हाथी और 400 से अधिक हाथी कैद में होने का अनुमान है। दोनों ही आबादियां कई चुनौतियों का सामना कर रही हैं। जंगली हाथियों के सामने जंगलों का कम होना, उनके प्राकृतिक आवास का बंटना, इंसान-हाथी संघर्ष और शिकार जैसी समस्याएं हैं। वहीं, कैद में रहने वाले कई हाथी अब भी लकड़ी काटने और पर्यटन से जुड़े कामों में इस्तेमाल किए जाते हैं और उन्हें विशेषज्ञ पशु चिकित्सा सेवाएं सीमित रूप से मिल पाती हैं।

संरक्षण विशेषज्ञों के मुताबिक, लाओस में हर साल केवल एक या दो हाथियों का जन्म होता है, जबकि करीब 10 हाथियों की मौत हो जाती है। नई पहल के तहत लुआंग प्रबांग स्थित Mandalao Elephant Conservation में Elephant Rapid Response Team की शुरुआत की गई है। इस मौके पर लाओस सरकार के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। Vantara ने टीम को पूरी तरह सुसज्जित मोबाइल पशु चिकित्सा यूनिट उपलब्ध कराई है। इसकी मदद से देशभर में बीमार और घायल हाथियों को तत्काल चिकित्सा सहायता दी जा सकेगी। यह सुविधा जंगली और इंसानों की देखरेख में रह रहे दोनों तरह के हाथियों के लिए उपलब्ध होगी।

कार्यक्रम के तहत आपातकालीन इलाज, पुनर्वास और लंबे समय तक देखभाल के लिए विशेष हाथी अस्पताल बनाने की भी योजना है। Mandalao के अनुसार, यह पशु चिकित्सा सेवा हाथी मालिकों और हाथियों की जिम्मेदारी संभालने वाले सरकारी विभागों को मुफ्त दी जाएगी। इस पहल की शुरुआत के साथ ही 43 वर्षीय मादा हाथी Mae Khamnoy को भी बचाया गया है। उसने अपना पूरा जीवन लकड़ी काटने के काम में बिताया। संस्थाओं के मुताबिक, मुश्किल परिस्थितियों के कारण गर्भावस्था के दौरान उसने अपने दो बच्चों को खो दिया।

हाल में उसे वियनतियाने में एक व्यस्त सड़क के किनारे अकेले रखा गया था, जहां उसका इस्तेमाल पर्यटकों को सवारी कराने और प्रदर्शन के लिए किया जाता था। अब Mae Khamnoy को Mandalao ले जाया जाएगा, जहां वह रिटायरमेंट और लंबे समय तक देखभाल में रहेगी। उसे पशु चिकित्सा उपचार, पौष्टिक भोजन और दूसरे हाथियों के साथ रहने का मौका मिलेगा, जिससे वह सामाजिक रूप से भी जुड़ सकेगी।

उसका मामला काम करने वाले हाथियों की समस्याओं को भी सामने लाता है। इनमें लंबे समय तक काम करने से होने वाली चोटें, अनुचित सवारी उपकरण और हुक के इस्तेमाल से होने वाली परेशानियां शामिल हैं। पहल के तहत Mandalao और Vantara की पशु चिकित्सा टीमों ने 12 हाथियों के लिए हेल्थ कैंप भी लगाया। इस दौरान हाथियों की व्यापक स्वास्थ्य जांच, जरूरी परीक्षण और विशेषज्ञों से परामर्श किया गया। हाथियों की देखभाल करने वाले कर्मचारियों और पशु चिकित्सकों को भी कल्याण, देखभाल, पोषण और बीमारियों से बचाव से जुड़ी ट्रेनिंग दी जाएगी।

यह साझेदारी केवल इंसानों की देखरेख में रहने वाले हाथियों तक सीमित नहीं है। दोनों संस्थाएं लाओस में जंगली हाथियों की आबादी को बढ़ाने और उनकी आनुवंशिक विविधता बचाने के लिए भी काम करेंगी। इसके तहत हाथियों की आबादी बढ़ाना, उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा, स्थानीय समुदायों की भागीदारी, इंसान-हाथी संघर्ष कम करना और अवैध शिकार पर रोक जैसे क्षेत्रों में काम किया जाएगा।

इन प्रयासों को लाओस सरकार, स्थानीय समुदायों और संरक्षण से जुड़े संगठनों के सहयोग से आगे बढ़ाया जाएगा। Vantara के विशेष निदेशक अजीत कुलकर्णी ने कहा कि Mandalao के साथ मिलकर लाओस के हाथियों के संरक्षण और स्थानीय विशेषज्ञता को मजबूत करने की दिशा में काम करना इस साझेदारी का उद्देश्य है।