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पारंपरिक दीयों की बढ़ती मांग से वाराणसी के मिट्टी के बर्तन बनाने वालों के चेहरे खिले

Varanasi: उत्तर प्रदेश के वाराणसी का सुद्धिपुर गांव में सूखने के लिए रखे मिट्टी के दीयों की कतारें स्थानीय कारीगरों के चेहरों पर खुशी ला रही हैं, ये गांव दिवाली से पहले चहल-पहल से गुलजार है।

पीढ़ियों से इस व्यवसाय से जुड़े कारीगर कहते हैं कि लोग स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों को ज़्यादा पसंद कर रहे हैं। जिससे इस साल मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ी है।

कारीगर सुनील प्रजापति ने बताया कि “जितना चाईनीज आइटम था, वो तो बंद ही हो चुका है डिमांड बंद हो चुका है। उसके बाद सारे दीये जा रहे हैं बिक रहे हैं, त्यौहार से पहले मांग को पूरा करने के लिए कारीगरों के परिवार ज्यादा काम कर रहे हैं।

कारीगर रघुराय प्रजापति ने बताया कि “यह हर जगह मतलब यही दीया जलता है और पीछे से डिमांड भी बढ़ रहा है मतलब सब जगह बिकता है ये दीया। दिवाली पर तो फिलहाल बहुत ज्यादा बिक रहा है। ”

20 अक्टूबर को देश भर के घरों को रोशन करने वाले लाखों दीयों में से कई वाराणसी के इस छोटे से गांव से होंगे।