केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को बजट सत्र के दौरान लोकसभा में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। यह विधेयक विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 में संशोधन करने के लिए लाया गया है, जिसका उद्देश्य भारत में विदेशी चंदे को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। कार्यवाही के दौरान नित्यानंद राय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह सेवा, पारदर्शिता और राष्ट्रीय हित सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक संशोधन है।
हालांकि, इस विधेयक का कई विपक्षी सांसदों ने जोरदार विरोध किया। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इसमें “विधायी शक्तियों का अत्यधिक प्रत्यायोजन” है। उन्होंने कहा, “यह विधेयक संपत्तियों पर व्यापक और बिना स्पष्ट दिशा-निर्देश के कार्यकारी नियंत्रण की अनुमति देता है, जिसमें अस्थायी और स्थायी रूप से संपत्तियों को किसी प्राधिकरण में निहित करना शामिल है। यह संविधान के अनुच्छेद 300A के तहत गंभीर चिंताएं पैदा करता है। साथ ही, यह एक ही प्राधिकरण में न्यायिक, कार्यकारी और अर्ध-न्यायिक शक्तियों को केंद्रित करता है, जो प्राकृतिक न्याय और शक्तियों के विभाजन के सिद्धांतों को कमजोर करता है।”
तिवारी ने आगे कहा कि यह प्रावधान, जिसमें गैर-विदेशी स्रोतों से आंशिक रूप से वित्त पोषित संपत्तियों को भी अधिग्रहित करने और निपटान करने की अनुमति है, अत्यधिक असंतुलित है और इससे नागरिक समाज की गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जो अनुच्छेद 19(1)(c) के तहत मिले संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित करता है।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद प्रतिमा मंडल ने भी इस विधेयक का विरोध करते हुए इसे “कठोर” (ड्रैकॉनियन) बताया और कहा कि यह अत्यधिक अधिकार केंद्रित करता है तथा संघीय संतुलन को कमजोर करता है। उन्होंने कहा, “यह एक कठोर विधेयक है, जो कार्यपालिका में अत्यधिक अधिकार केंद्रीकृत करता है और संस्थागत संतुलन को कमजोर करता है। आपराधिक कार्रवाई शुरू करने से पहले केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता कार्यपालिका को अत्यधिक विवेकाधिकार देती है। इसलिए मैं इस विधेयक का विरोध करती हूं।”
विपक्ष की आपत्तियों के जवाब में नित्यानंद राय ने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य विदेशी अंशदान के नियमन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। उन्होंने कहा, “यह संशोधन सेवा, पारदर्शिता और राष्ट्रीय हित के लिए आवश्यक है। अधिनियम के क्रियान्वयन के दौरान कुछ प्रावधानों में स्पष्टता की कमी महसूस की गई, जिससे प्रशासनिक कठिनाइयां आईं।”
मनीष तिवारी की आपत्तियों पर जवाब देते हुए राय ने कहा कि संपत्तियों के प्रबंधन और निपटान की नीति अधिनियम में ही स्पष्ट रूप से परिभाषित है और यह विधेयक अस्थायी व स्थायी निहितकरण के बीच अंतर करता है, जिससे संगठनों को अपने स्थिति सुधारने का अवसर मिलता है। प्रतिमा मंडल की आपत्तियों पर उन्होंने कहा, “यह विधेयक केवल उन लोगों के लिए ‘खतरनाक’ है, जिनकी मंशा गलत है—जो विदेशी फंड का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों, धर्मांतरण या व्यक्तिगत लाभ के लिए करते हैं। मोदी सरकार संविधान और राष्ट्रीय हित के खिलाफ काम करने वालों को बर्दाश्त नहीं करेगी।” विपक्ष के विरोध के बावजूद, सभापति कृष्ण प्रसाद तेनेटी ने ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित कराते हुए विधेयक को पेश कर दिया।