इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बुधवार को कथित यौन उत्पीड़न मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी को अग्रिम जमानत दे दी। यह आदेश न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने सुनाया। अदालत ने 27 फरवरी को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। दोनों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। यह मामला झूंसी थाने में दर्ज एफआईआर के बाद सामने आया, जो एडीजे (रेप और पॉक्सो विशेष अदालत) विनोद कुमार चौरसिया के निर्देश पर दर्ज की गई थी।
यह आदेश स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा दायर आवेदन (धारा 173(4)) पर दिया गया। इससे पहले 27 फरवरी को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने हाई कोर्ट द्वारा गिरफ्तारी पर रोक लगाने के फैसले का स्वागत किया था और कहा था कि अदालत ने उनकी दलीलों को सही माना है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा था, “हमारे वकील ने बताया कि अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद हमारी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। हमने कहा था कि यह मामला मनगढ़ंत है। अदालत को हमारी बात में दम लगा, इसलिए यह फैसला आया।” उन्होंने आगे कहा, “हमें हमेशा न्याय की उम्मीद थी। हालांकि आज के समय में भरोसा करना जोखिम भरा हो गया है, लेकिन हम अपनी बात रखने के लिए तैयार थे। हमें विश्वास था कि कहीं न कहीं सच की जीत होगी।”