तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन लोकसभा क्षेत्रों के परिसीमन से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिएएक सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे।संभावना है कि इस बैठक में वह केंद्र को घेर सकते हैं। शिक्षा निधि जारी न करने सहित कई मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार के साथ राज्य की द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार का टकराव देखने को मिलता रहा है।
प्रस्तावित परिसीमन राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच टकराव का नया मुद्दा बन गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति तथा नीट का विरोध और हिंदी भाषा को थोपना सहित उन अन्य मुद्दों को लेकर द्रमुक भाजपा नीत केंद्र सरकार पर निशाना साध रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्टालिन पर परिसीमन मुद्दे को लेकर ‘‘गलत सूचना’’ फैलाने का आरोप लगाया था और दक्षिणी राज्यों को आश्वासन दिया था कि परिसीमन के कारण ‘‘एक भी संसदीय सीट’’ कम नहीं होगी।
भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने कहा कि स्टालिन परिसीमन के बारे में ‘‘बेवजह भय का माहौल’’ बनाकर ‘‘नई कहानी गढ़ने की’’ कोशिश कर रहे हैं क्योंकि राज्य के लोगों ने तीन-भाषा नीति पर उनके तर्क को खारिज कर दिया है। मुख्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक और सत्तारूढ़ द्रमुक के सहयोगी दलों सहित राज्य के लगभग सभी प्रमुख दल बैठक में भाग लेंगे। हालांकि, भाजपा, नाम तमिलर काची (एनटीके) और पूर्व केंद्रीय मंत्री जीके वासन के नेतृत्व वाली तमिल मनीला कांग्रेस (मूपनार) ने पहले ही घोषणा कर दी है कि वे बैठक में शामिल नहीं होंगे। भाजपा पांच मार्च को तीन-भाषा नीति पर हस्ताक्षर अभियान भी शुरू करेगी, जबकि स्टालिन ने घोषणा की थी कि राज्य एक और ‘‘भाषा युद्ध’’ के लिए तैयार है।
मुख्यमंत्री स्टालिन परिसीमन के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे
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