Breaking News

फ्रांस में दंगों के बाद पुलिस का बड़ा एक्शन, 2,700 लोग हिरासत में लिए गए     |   तिब्बत में 7 की तीव्रता वाले भीषण भूकंप से भारी तबाही, 16 लोगों की मौत, 32 घायल     |   टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: कोटा से दबोचे गए तीन आरोपियों से कड़ी पूछताछ     |   हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का बड़ा असर, कई कंपनियां और दफ्तर बंद     |   बिहार-यूपी समेत 4 राज्यों की 28 MLC सीटों पर वोटिंग जारी     |  

झारखंड में ग्रामीण विकास को नई रफ्तार, उत्कृष्ट पंचायतों का सम्मान

Jharkhand: राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के पावन अवसर पर आज झारखंड में ग्रामीण विकास और स्थानीय स्वशासन को एक नई दिशा मिली। रांची के टाना भगत स्टेडियम, खेलगांव में ‘मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार सह मुखिया सम्मेलन 2026’ (दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडलीय समारोह) का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और प्रदेश की पंचायतों के सशक्तिकरण पर जोर दिया।

पंचायतों के उत्कृष्ट कार्यों का सम्मान
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाली पंचायतों और मुखियाओं को प्रोत्साहित करना था। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पंचायतें लोकतंत्र की आधारशिला हैं। उन्होंने बेहतर शासन, बुनियादी सुविधाओं के विकास और जनसेवा के क्षेत्र में शानदार काम करने वाली पंचायतों को पुरस्कृत किया। यह आयोजन न केवल सम्मानित करने के लिए था, बल्कि उन सफल मॉडल्स को अन्य पंचायतों के सामने रखने का एक मंच भी था, जिससे गांव का सर्वांगीण विकास संभव हो सके।

पंचायती राज व्यवस्था को मजबूती
कार्यक्रम में पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडे सिंह भी उपस्थित रहीं। उन्होंने 73वें संवैधानिक संशोधन के तहत पंचायती राज संस्थाओं को और अधिक अधिकार संपन्न बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि राज्य सरकार ‘मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन योजना’ के माध्यम से यह सुनिश्चित कर रही है कि गांवों की विकास यात्रा में कोई भी पंचायत पीछे न छूटे।

विकास की नई राह
इस सम्मेलन में दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के पंचायत प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्र में किए गए नवाचारों और विकास कार्यों की उपलब्धियों को साझा किया। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा बेहतर प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को लाखों रुपये तक के पुरस्कार दिए जाते हैं, ताकि गांवों में प्रतिस्पर्धा और विकास की सकारात्मक होड़ बनी रहे। यह सम्मेलन इस बात का प्रमाण है कि झारखंड में ग्रामीण विकास के लिए विकेंद्रीकृत नियोजन और स्थानीय जनभागीदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।