समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयानों को लेकर भाजपा नेताओं और योगी सरकार के मंत्रियों ने उन पर तीखा हमला बोला है। भाजपा नेताओं ने सपा पर नकारात्मक राजनीति करने और चुनावी हार के बाद ईवीएम, पुलिस-प्रशासन और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप लगाया। साथ ही अखिलेश यादव के पीडीए के दावे और रैली रद्द होने को लेकर भी निशाना साधा।
मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा की देश के संविधान में आस्था नहीं है और उसका उद्देश्य केवल नकारात्मक एजेंडा चलाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान गुंडागर्दी, अराजकता, बेईमानी और भाई-भतीजावाद को बढ़ावा मिला था। भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि जब सपा चुनाव जीतती है तो वह इन मुद्दों पर चर्चा नहीं करती, लेकिन हारने के बाद ईवीएम, पुलिस-प्रशासन और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने लगती है।
वहीं मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में विकास के साथ प्रदेश की विरासत को भी सुरक्षित किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि असली पीडीए भाजपा की केंद्र और प्रदेश सरकारों में है। यूपी अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष मोहसिन रजा ने कहा कि समाजवादी पार्टी के मुखिया और उसके कई नेता हताश हैं। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने प्रदेश में कानून व्यवस्था बेहतर करके लोगों के बीच विश्वास कायम किया है। मोहसिन रजा ने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि यह समाजवादी पार्टी का अंतिम चुनाव है और पीडीए कोई नई पार्टी बनने जा रही है।
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने भी सपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सत्ता से बाहर होते ही सपा की ‘पर्ची-खर्ची’ बंद हो गई, इसलिए अब उसे पीडीए याद आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में चौरसिया, शाक्य और कुशवाहा समाज का अपमान किया जाता है।दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि चुनाव नजदीक आते ही सपा नेताओं का मानसिक संतुलन बिगड़ रहा है। उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि जेन-जी की बात करने वाले अखिलेश यादव के शासनकाल में अपराधियों और माफियाओं पर मेहरबानी की जाती थी। उन्होंने दावा किया कि सपा सरकार में ‘एक जिला-एक माफिया’ की पहचान बन गई थी।
उन्होंने कहा कि आज प्रदेश की जनता पर्ची-खर्ची की जगह सुशासन और विकास चाहती है और 2027 के विधानसभा चुनाव में भी जनता भाजपा के साथ खड़ी होगी। अखिलेश यादव की रैली रद्द होने को लेकर भी भाजपा नेताओं ने उन्हें घेरा। मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि हो सकता है अखिलेश यादव खुद कार्यक्रम में नहीं जाना चाहते हों और इसलिए बहाना बना रहे हों। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम स्थल के पास जेवर एयरपोर्ट है और वहां जाने का विकल्प मौजूद था। इसके अलावा वहां छह लेन का हाईवे भी है।
मंत्री अनिल कुमार ने कहा कि अखिलेश यादव पहले कार्यक्रम जारी करते हैं और बाद में खुद ही उसे रद्द कर देते हैं। उन्होंने कार्यक्रम की अनुमति नहीं मिलने को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताया। वहीं मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि किसी कार्यक्रम की अनुमति जिला प्रशासन देता है, सरकार नहीं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में किसी को भी कार्यक्रम करने से नहीं रोका जाता। अगर कोई अपना कार्यक्रम नहीं कर पाता है तो इसके लिए भाजपा को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। भाजपा नेताओं ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था और विकास को लेकर जनता के बीच सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा है और आगामी विधानसभा चुनाव में भी जनता इसका जवाब देगी।