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9/11 हमले के 25 साल: PM मोदी ने याद किया स्वामी विवेकानंद का ऐतिहासिक शिकागो भाषण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को स्वामी विवेकानंद के 11 सितंबर 1893 को शिकागो में दिए ऐतिहासिक भाषण को याद किया। उन्होंने कहा कि विवेकानंद का सहिष्णुता, सभी धर्मों को स्वीकार करने और मानवता में सद्भाव का संदेश आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा, “11 सितंबर 1893, शिकागो। स्वामी विवेकानंद के प्रभावशाली संबोधन ने भारत के सभ्यतागत मूल्यों की झलक दुनिया को दिखाई। उनके प्रेरणादायक शब्द आज भी पूरी दुनिया में गूंजते हैं।”

पीएम मोदी ने स्वामी विवेकानंद के उस ऐतिहासिक भाषण के अंश भी साझा किए, जो उन्होंने शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद (Parliament of Religions) में दिया था। विवेकानंद ने अपने संबोधन में धार्मिक सहिष्णुता और सभी धर्मों को स्वीकार करने की भारत की परंपरा पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें ऐसे धर्म से जुड़े होने पर गर्व है, जिसने दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति का संदेश दिया। उन्होंने कहा था, “मुझे उस धर्म से जुड़े होने पर गर्व है, जिसने दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति दोनों सिखाई हैं। हम केवल सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता में विश्वास नहीं करते, बल्कि सभी धर्मों को सत्य मानकर स्वीकार करते हैं।”

स्वामी विवेकानंद ने अलग-अलग धार्मिक मार्गों की तुलना अलग-अलग दिशाओं से बहने वाली नदियों से की थी, जो अंत में एक ही समुद्र में जाकर मिलती हैं। उन्होंने भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए कहा था कि मनुष्य जिस भी मार्ग से ईश्वर तक पहुंचने का प्रयास करता है, अंततः वह उसी मंजिल की ओर बढ़ता है।

विवेकानंद ने अपने भाषण में कट्टरता, संकीर्णता और धार्मिक उन्माद की भी कड़ी निंदा की थी। उन्होंने कहा था कि इन ताकतों ने दुनिया को हिंसा, खून-खराबे और विनाश से भर दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि शिकागो में आयोजित यह सम्मेलन धार्मिक नफरत और उत्पीड़न के अंत की शुरुआत बनेगा। प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश ऐसे समय आया है, जब अमेरिका 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों की 25वीं बरसी मना रहा है।

11 सितंबर 2001 को अल-कायदा के 19 आतंकवादियों ने चार यात्री विमानों का अपहरण कर अमेरिका में समन्वित आतंकी हमला किया था। इनमें से दो विमान न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की ट्विन टावर्स से टकराए थे। तीसरा विमान वर्जीनिया के आर्लिंगटन स्थित पेंटागन से टकराया, जबकि चौथा विमान पेंसिल्वेनिया के शैंक्सविल के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।

अमेरिका के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन हमलों में 2,977 लोगों की मौत हुई थी। इस घटना के बाद अमेरिका की आतंकवाद विरोधी नीतियों, सैन्य अभियानों और घरेलू सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए। न्यूयॉर्क के ग्राउंड जीरो पर हर साल हमले में मारे गए लोगों की याद में श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया जाता है। इस दौरान पीड़ितों के परिवार और करीबी लोग उनके नाम पढ़कर उन्हें याद करते हैं। इन हमलों की साजिश अल-कायदा के तत्कालीन प्रमुख ओसामा बिन लादेन ने रची थी।