उत्तर प्रदेश में शारदीय नवरात्र की सप्तमी से नवमी तक प्रमुख देवी मंदिरों में देवी गीत और दुर्गा सप्तशती पाठ के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मिशन शक्ति के तहत योगी सरकार की इस पहल का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इन आयोजनों के जरिए स्थानीय कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।
16 अक्टूबर को जारी जानकारी के अनुसार, शनिवार से सोमवार तक प्रदेश के चयनित देवी मंदिरों में तीन दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। इनमें पारंपरिक देवी गीतों का गायन और दुर्गा सप्तशती का पाठ मुख्य आकर्षण रहेगा।
26 मंदिरों में होंगे सांस्कृतिक आयोजन
योगी सरकार प्रदेश के 26 प्रमुख देवी मंदिरों में इन कार्यक्रमों का आयोजन कराएगी। प्रत्येक मंदिर में तीन स्थानीय कलाकार प्रस्तुति देंगे। इस तरह कुल 78 कलाकारों को मंच मिलेगा। इनमें महिला कलाकारों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे उन्हें अपनी कला दिखाने और रोजगार के अवसर हासिल करने में मदद मिलेगी।
लखनऊ और प्रयागराज के चार मंदिरों में भी स्थानीय कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इनमें लखनऊ के चंद्रिका देवी और संकटा देवी मंदिर तथा प्रयागराज के अलोपी देवी और ललिता देवी मंदिर शामिल हैं।
महिला सुरक्षा और स्वावलंबन पर रहेगा जोर
इन कार्यक्रमों के जरिए धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जागरूकता का संदेश भी दिया जाएगा। महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूक किया जाएगा। मिशन शक्ति के तहत यह पहल महिला सशक्तीकरण और स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने का माध्यम बनेगी।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि शारदीय नवरात्र आस्था, शक्ति और सांस्कृतिक परंपराओं का पर्व है। सरकार का प्रयास है कि धार्मिक आयोजन सामाजिक बदलाव का माध्यम बनें। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों से विशेष रूप से महिला कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। साथ ही, पारंपरिक देवी गीतों और लोक संस्कृति को बढ़ावा मिलने के साथ कलाकारों की आजीविका को भी सहारा मिलेगा।
इन 26 देवी मंदिरों में होंगे आयोजन
योगी सरकार की ओर से आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में मां विंध्यवासिनी देवी मंदिर (मीरजापुर), विशालाक्षी मंदिर (वाराणसी), ज्वाला देवी मंदिर (सोनभद्र), सीता समाहित स्थल (सीतामढ़ी, भदोही), अलोपशंकरी देवी और ललिता देवी मंदिर (प्रयागराज), कड़ावासिनी मंदिर (कौशांबी), देवीपाटन मंदिर (बलरामपुर), ललिता देवी मंदिर (नैमिषारण्य, सीतापुर), शाकुंभरी देवी मंदिर (सहारनपुर), कात्यायनी देवी मंदिर (मथुरा), मां शीतला चौकिया धाम (जौनपुर), बेल्हा देवी मंदिर (प्रतापगढ़), महालक्ष्मी देवी मंदिर (वाराणसी), चंद्रिका देवी मंदिर (उन्नाव), देवकाली मंदिर (औरैया), मां तरकुलहा देवी धाम (गोरखपुर), मां शीतला माता स्थल (मऊ), मां सिंहवाहिनी काली देवी मंदिर (चित्रकूट), गायत्री शक्तिपीठ (हमीरपुर), बैरागढ़ माता मंदिर (कोंच, जालौन), कुष्मांडा देवी मंदिर (घाटमपुर), शीतला माता मंदिर (मैनपुरी), चामुंडा देवी मंदिर (फिरोजाबाद) और लखनऊ के चंद्रिका देवी व संकटा देवी मंदिर शामिल हैं। इस पहल से नवरात्र के दौरान धार्मिक स्थलों पर सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी कला के प्रदर्शन का अवसर प्राप्त होगा।