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‘संत संसद 2026’: नारायण गिरि महाराज बोले— मतभेद के बावजूद संत हमेशा रहते हैं एकजुट

29 मार्च को जयपुर में ‘संत संसद 2026’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन भक्ति भाव के साथ किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन नेटवर्क10 न्यूज चैनल द्वारा किया गया, जिसमें देशभर से अनेक साधु-संतों, महामंडलेश्वरों और धार्मिक हस्तियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का मुख्य विषय था— “अब नहीं होगा जात-पात, बात होगी सिर्फ राष्ट्रवाद”। इस विषय पर सभी संतों ने अपने विचार रखते हुए समाज में एकता, भाईचारे और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने पर जोर दिया।

इस अवसर पर श्रीमहंत नारायण गिरि जी महाराज भी उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि संत आपस में कभी-कभी महाभारत की तरह बहस कर लेते हैं, लेकिन अंत में सभी एक हो जाते हैं। उन्होंने अखाड़ा परिषद के बारे में भी कहा कि पूरा अखाड़ा परिषद एकजुट है और इसके अध्यक्ष रविंद्र पुरी जी के नेतृत्व में सभी अखाड़े साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

महाराज ने कहा कि सृष्टि के प्रारंभ से ही संतों ने इस धरती पर राष्ट्रवाद की भावना को जागृत किया है। उन्होंने बताया कि युगों-युगों से आचार्यों ने समाज में समरसता और विभिन्न वर्गों के बीच संतुलन स्थापित करने का निरंतर प्रयास किया है।

अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि आज भले ही जातिवाद समाप्त करने की बात की जा रही हो, लेकिन पारंपरिक वर्ण व्यवस्था को समाप्त करना संभव नहीं है। उनके अनुसार, यदि यह व्यवस्था पूरी तरह समाप्त हो जाती है, तो सनातन परंपरा की मूल संरचना भी प्रभावित हो सकती है।