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Parshuram Jayanti 2025: जानें क्यों मनाई जाती है परशुराम जयंती ? इसका पूरा इतिहास

Parshuram Jayanti 2025: हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान विष्णु के छठे अवतार  परशुराम जी की जयंती मनाई जाती है. इस साल यह 29 अप्रैल को मनाई जाएगी. आपको बता दें कि तृतीया तिथि 29 अप्रैल को शुरू होगी और 30 अप्रैल को दोपहर 02 बजकर 12 मिनट पर समाप्त होगी. भगवान परशुराम का अवतार प्रदोष काल में हुआ है. इसलिए 29 अप्रैल को परशुराम जयंती मनाई जाएगी. 

कौन है परशुराम जी ?
परशुराम जी ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र थे और इन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. माता-पिता ने इन्हें राम नाम दिया गया था, लेकिन भगवान शिव से इन्हें परशु नाम का अस्त्र मिला था और इसी कारण इनका नाम परशुराम प्रचलित हुआ. परशुराम जी के गुरु स्वयं भगवान शिव हैं. वहीं विश्वामित्र और ऋचीक को भी इनका गुरु माना जाता है. भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण परशुराम जी के शिष्य थे.

क्यों नहीं होती परशुराम जी की पूजा ?
भगवान परशुराम का जन्म ब्राह्मण कुल में हुआ, लेकिन व्यवहार क्षत्रियों जैसा था. इन्होंने 21 बार इस धरती को क्षत्रिय विहीन किया था। यही नहीं इनके क्रोध से भगवान गणेश भी नहीं बच पाए थे. बेहद उग्र स्वभाव के कारण परशुराम जी की पूजा नहीं बल्कि उनका आव्हान किया जाता है.

शास्त्रों के अनुसार एक सामान्य प्राणी के लिए अधिक ऊर्जा को नियंत्रित करना मुश्किल है, और परशुराम जी विष्णु जी के उग्र अवतरा है, इनकी पूजा से अत्याधिक ऊर्जा प्राप्त होती है. यही वजह है कि गृहस्थ व्यक्ति या सामान्य जीवन जीने वाले व्यक्ति इनकी पूजा नहीं करते.

किसके कहने पर परशुराम जी ने मां का वध किया ?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान परशुराम माता रेणुका और ॠषि जमदग्नि की चौथी संतान थे. परशुराम के चार बड़े भाई थे. वे आज्ञाकारी होने के साथ-साथ उग्र स्वभाव के भी थे.  ॠषि जमदग्नि ने एक बार अपने सभी पुत्र को माता की हत्या करने की आज्ञा दी लेकिन तीनों बेटों ने ऐसा करने से मना कर दिया लेकिन भगवान परशुराम ने पिता के आदेशानुसार माता का सिर धड़ से अलग कर दिया. पिता ऋषि जमदग्नि अपने पुत्र से बेहद प्रसन्न हुए और भगवान परशुराम को तीन वरदान दिए क्या थे वो वरदान और आखिर क्यों परशुराम जी ने माता का वध किया जानें.

क्यों परशुराम जी ने की मां की हत्या ?
एक दिन जब सब पुत्र काम से जंगल चले गए तब माता रेणुका स्नान करने सरोवर गईं थी. वहां राजा चित्ररथ भी नौकाविहार कर रहे थे. उन्हें देख ऋषि की पत्नी रेणुका का मन विचलित हो गया और वह उसी मनोदशा में आश्रम लौट आईं. आश्रम में ऋषि जमदग्नि ने जब पत्नी की ये दशा देखी तो उन्हें अपनी दिव्य दृष्टि से सब ज्ञात हो गया.

इससे वह बेहद क्रोधित हुए और अपने पुत्रों को माता का वध करने का आदेश दिया लेकिन सभी ने इनकार कर दिया. महर्षि जमदग्नि ने उन्हें श्राप दे दिया और उनकी विचार शक्ति को खत्म कर दिया. तभी वहां परशुराम आ गए और उन्होंने माता का सिर काट दिया.

परशुराम जी ने मांगे 3 वरदान
महर्षि जमदग्नि परशुराम जी से बहुत प्रसन्न हुए और उन्हें वर मांगने के लिए कहा तब परशुराम ने 3 वरदान मांगे और पिता ने उनकी सारी इच्छाएं पूरी की.

  • पहला माता रेणुका को पुनर्जीवित करना
  • दूसरा चारों भाइयों को ठीक करना
  • तीसरा कि उन्हें कभी पराजय का सामना न करना पड़े, वह दीर्धायु हों.